भास्करन्यूज | शिमला राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग में ट्रांस्फर लगी रोक को हटा दिया है। जिन
स्कूलों में टीचरों के पद खाली हैं वहां पर विभाग शिक्षकों की ट्रांसफर कर
सकेगा। ट्रांसफर करने के लिए सीएम की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। बिना मुख्यमंत्री की मंजूरी के शिक्षकों का तबादला नहीं किया जा सकता।
कार्मिक विभाग ने सोमवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
इससे पहले 8 जून को राज्य सरकार ने शिक्षकों के तबादलों पर पूर्णत रोक लगाई थी। इस के पीछे तर्क दिया गया था कि मिड सेशन में शिक्षकों के तबादले होने से छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है। प्रदेश भर में टीचरों की कमी के चलते पढ़ाई बाधित होने की शिकायतें मिलने के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा।
इसलिएखल रही टीचरों की ज्यादा कमी : प्रदेशकी कांग्रेस सरकार ने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में सैकड़ों स्कूलों को अपग्रेड किया है नए स्कूल खोले हैं। शिक्षा विभाग में पहले ही स्टाफ की कमी चल रही है।
नए स्कूल खुल जाने से टीचरों की कमी और ज्यादा बढ़ गई थी। अपग्रेडेड और नए खुले स्कूलों में स्टाफ होने के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। वहीं विपक्ष भी सरकार पर ये आरोप लगा रहा था कि सरकार ने स्कूल तो खोल दिए हैं लेकिन इनमें स्टाफ तक मुहैया नहीं करवाया। सरकार एसएमसी आधार पर भी स्कूलों में खाली पद नहीं भर रही है। ऐसे में खाली पदों को भरने के लिए ये रोक हटानी पड़ी है।
लोगों की तरफ से आई थी शिकायत
प्रदेशके स्कूलों में टीचरों के सैकड़ों पद खाली पड़े हुए हैं। स्थानीय लोग या जन प्रतिनिधि जब इस मामले को विभाग के समक्ष उठाते थे तो विभाग का जवाब रहता था कि तबादलों पर प्रतिबंध है। ऐसे में अभी ट्रांसफर कर टीचर नहीं भेजे जा सकते। जैसे ही नई भर्ती पूरी होगी टीचरों की तैनाती ऐसे स्कूलों में कर दी जाएगी। सरकार के निर्णय के बाद अब स्कूलों में स्टाफ मुहैया करवाने में दिक्कत पेश नहीं आएगी।
मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर होंगे तबादले
राज्यसरकार ने भले ही शिक्षकों के तबादलों पर से रोक हटाई है। इसके बाद भी मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही इन तबादलों को किया जाएगा। शिक्षा विभाग यदि किसी स्कूल में स्टाफ की कमी को देखते हुए टीचर की तैनाती करना चाहता है तो उसका केस बनाकर मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। सीएम की अप्रूवल आने के बाद ही ट्रांसफर की जाएगी। सरकार का तर्क है कि भले ही तबादलों पर से प्रतिबंध हटाया गया है, लेकिन रूटीन के तबादले नहीं होंगे। केवल खाली पदों के अनुसार ही ट्रांस्फर की जाएगी।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
इससे पहले 8 जून को राज्य सरकार ने शिक्षकों के तबादलों पर पूर्णत रोक लगाई थी। इस के पीछे तर्क दिया गया था कि मिड सेशन में शिक्षकों के तबादले होने से छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है। प्रदेश भर में टीचरों की कमी के चलते पढ़ाई बाधित होने की शिकायतें मिलने के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा।
इसलिएखल रही टीचरों की ज्यादा कमी : प्रदेशकी कांग्रेस सरकार ने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में सैकड़ों स्कूलों को अपग्रेड किया है नए स्कूल खोले हैं। शिक्षा विभाग में पहले ही स्टाफ की कमी चल रही है।
नए स्कूल खुल जाने से टीचरों की कमी और ज्यादा बढ़ गई थी। अपग्रेडेड और नए खुले स्कूलों में स्टाफ होने के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। वहीं विपक्ष भी सरकार पर ये आरोप लगा रहा था कि सरकार ने स्कूल तो खोल दिए हैं लेकिन इनमें स्टाफ तक मुहैया नहीं करवाया। सरकार एसएमसी आधार पर भी स्कूलों में खाली पद नहीं भर रही है। ऐसे में खाली पदों को भरने के लिए ये रोक हटानी पड़ी है।
लोगों की तरफ से आई थी शिकायत
प्रदेशके स्कूलों में टीचरों के सैकड़ों पद खाली पड़े हुए हैं। स्थानीय लोग या जन प्रतिनिधि जब इस मामले को विभाग के समक्ष उठाते थे तो विभाग का जवाब रहता था कि तबादलों पर प्रतिबंध है। ऐसे में अभी ट्रांसफर कर टीचर नहीं भेजे जा सकते। जैसे ही नई भर्ती पूरी होगी टीचरों की तैनाती ऐसे स्कूलों में कर दी जाएगी। सरकार के निर्णय के बाद अब स्कूलों में स्टाफ मुहैया करवाने में दिक्कत पेश नहीं आएगी।
मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर होंगे तबादले
राज्यसरकार ने भले ही शिक्षकों के तबादलों पर से रोक हटाई है। इसके बाद भी मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही इन तबादलों को किया जाएगा। शिक्षा विभाग यदि किसी स्कूल में स्टाफ की कमी को देखते हुए टीचर की तैनाती करना चाहता है तो उसका केस बनाकर मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। सीएम की अप्रूवल आने के बाद ही ट्रांसफर की जाएगी। सरकार का तर्क है कि भले ही तबादलों पर से प्रतिबंध हटाया गया है, लेकिन रूटीन के तबादले नहीं होंगे। केवल खाली पदों के अनुसार ही ट्रांस्फर की जाएगी।
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