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शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को दी जाए प्राथमिकता: शांडिल

सामाजिकन्याय एवं अधिकारिता मंत्री डाॅ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि किसी भी देश के शक्तिशाली होने का एक पैमाना उस देश का मानव संसाधन है। जिस देश में साक्षर, स्वस्थ और कुशल मानव संसाधन है वह देश तेजी से विकास करता है।
हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति और राज्य संसाधन केंद्र द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा संस्थानों की कमी नहीं है हमारी प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना होना चाहिए।

उन्होंने बेटियों को बेहतर वातावरण देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग किशोरियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समस्याएं उठाना ही काफी नहीं है बल्कि उनका समाधान निकालना भी आवश्यक है। इस अवसर पर आईसीडीएस, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग सहित स्वयं सहायता समूह और हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के लगभग डेढ़ सौ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

स्वास्थ्य विभाग से आई डाॅ. अंजलि चौहान और उनकी सहयोगी डाॅ. पूनम संधू, स्वास्थ्य शिक्षक प्रेमलाल आजाद ने स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्रतिभागियों को दी। डाॅ. अंजलि ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में बहुत से अंधविश्वास और रूढिय़ां भी जिम्मेदार हैं खासतौर पर महिलाएं इसकी ज्यादा शिकार हैं। वे ऐसी बीमारियों के लिए भी स्वास्थ्य संस्थानों में देर से आती हैं जिनका शत प्रतिशत इलाज संभव है।

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति की राज्य समता संयोजिका डाॅ. रीना सिंह ने कहा कि किशोरियों के लिए विशेष तौर पर जानकारी उपलब्ध करवाए जाने की योजना होनी चाहिए। हिमाचल सरकार के आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के लिए अगर रोजगार के अवसर बढ़ाने हैं तो पर्यटन क्षेत्र को बढावा देना होगा। राज्य संसाधन केंद्र के निदेशक डाॅ. ओम प्रकाश भूरेटा ने कहा कि देश में 65 प्रतिशत युवा 35 साल की उम्र तक के हैं वहीं हिमाचल में भी इनकी संख्या 63 प्रतिशत तक है इसलिए आबादी के इस हिस्से को केंद्र में रखकर नीतियों की दिशा तय होनी चाहिए।

राज्य संसाधन केंद्र के अध्यक्ष डाॅ. कुलदीप सिंह तंवर ने जनसंख्या से संबंधित अनेक मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि जहां शिक्षा बेहतर है वहां कुल फर्टिलिटी रेट भी कम है। उन्होंने विकास को जनसंख्या नियंत्रण का सबसे बड़ा गर्भ निरोधक बताया। डाॅ. तंवर ने कहा कि आबादी के बारे में कोई भी नीति बनाते समय हमें इस बात पर भी ध्यान रखना होगा कि नीति किस आबादी को लाभ दे रही है।

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