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पत्राचार तक ही सीमित रहा शिक्षा विभाग

नगरोटा बगवां पीडब्ल्यूडी व शिक्षा विभाग की लेटलतीफी का खमियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा है। दोनों विभाग आपस में पत्राचार करते रहे जबकि जर्जर हालत में तबदील प्राथमिक विद्यालय की मरम्मत या फिर इसे गिराकर नया भवन बनाने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
विद्यालय के कमरे की छत का दो साल पहले भी प्लास्टर गिर चुका है और इससे अध्यापिका घायल हो गई थी।

अध्यापिका के घायल होने के बावजूद ढुलमुल रवैया अपनाया जाता रहा तथा जान जोखिम में डाल कर नौनिहाल पढ़ाई करते रहे। कमरे की छत का प्लास्टर गिरने के बाद स्कूल प्रबंधन समिति ने प्रस्ताव पारित कर शिक्षा विभाग को भवन की दयनीय स्थिति से अवगत करवाकर उचित कार्रवाई अंजाम में लाने की बात कही थी। शिक्षा विभाग ने लोक निर्माण विभाग से पत्राचार किया तो नवंबर 2015 से भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया। हैरानी वाला विषय है कि भवन तो असुरक्षित घोषित कर दिया गया पर विद्यार्थियों के लिए किसी अन्य स्थान की अस्थायी रूप से व्यवस्था नहीं की गई। अध्यापकों ने पहली से पांचवीं कक्षा के लगभग 21 बच्चों को मजबूरन कमरे से बाहर बरामदे में एक साथ बिठाना शुरू कर दिया। शिक्षा विभाग की ओर से समय रहते सबक न लेने का खामियाजा सात बच्चों को भुगतना पड़ा है। स्कूल के कमरे की जर्जर छत पर अभी भी पंखा लटका हुआ है तथा अध्यापकों का अंदर आना जाना लगा रहता है। हैरानी का विषय है कि शिक्षा विभाग की ओर से सर्व शिक्षा अभियान के तहत पैसों की कमी न होने का दावा किया जाता है बावजूद इसके स्कूल भवन की मरम्मत न करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
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