राज्य ब्यूरो, शिमला : प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में बच्चों का
भविष्य संवार रहे 1329 अध्यापकों को खुद के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
अनुबंध पर लगे इन अध्यापकों ने नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) की
शर्ते पूरी नहीं की हैं, जिसके कारण राज्य सरकार इन्हें नियमित नहीं कर पा
रही है।
नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के मानकों के अनुसार पहली से पांचवीं कक्षा को पढ़ाने वाला शिक्षक का जेबीटी होना जरूरी और यदि कोई अध्यापक जेबीटी नहीं है तो उसे शिक्षा में डिप्लोमा करना जरूरी किया गया था। इसके लिए एनसीटीई ने 31 मार्च 2015 तक का समय भी दिया था। राज्य के 1329 अध्यापकों ने इन मानकों को नजरअंदाज कर दिया और अब उनके नियमितीकरण में जेबीटी की शर्त का पेंच फस गया है।
शिक्षा विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार से यह कोर्स पूरा करने के लिए 31 मार्च 2017 तक का समय दिए जाने की मांग की है।
इन अध्यापकों को अब शिक्षा विभाग यह डिप्लोमा नहीं करवाएगा। 1329 अध्यापकों को यह डिप्लोमा अब अपने खर्च पर करना होगा। यह डिप्लोमा छह महीने का है और शिक्षा विभाग ने इसे देखते हुए केंद्र सरकार से इसमें हस्तक्षेप कर समय बढ़ाने की मांग की है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे दिल्ली में हाल में आयोजित हुई नीति आयोग की बैठक में के दौरान केंद्र सरकार के समक्ष रखा है।
उधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन ने बताया कि दिल्ली में आयोजित नीति अयोग की बैठक के दौरान राज्य शिक्षा विभाग के मामलों को रखा गया है। अनुबंध पर लगे जो अध्यापक शिक्षा में डिप्लोमा नहीं कर पाए हैं उनके लिए डिप्लोमा पूरा करने की शर्त को पूरा करने के लिए केंद्र से समय बढ़ाने को कहा गया है।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के मानकों के अनुसार पहली से पांचवीं कक्षा को पढ़ाने वाला शिक्षक का जेबीटी होना जरूरी और यदि कोई अध्यापक जेबीटी नहीं है तो उसे शिक्षा में डिप्लोमा करना जरूरी किया गया था। इसके लिए एनसीटीई ने 31 मार्च 2015 तक का समय भी दिया था। राज्य के 1329 अध्यापकों ने इन मानकों को नजरअंदाज कर दिया और अब उनके नियमितीकरण में जेबीटी की शर्त का पेंच फस गया है।
शिक्षा विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार से यह कोर्स पूरा करने के लिए 31 मार्च 2017 तक का समय दिए जाने की मांग की है।
इन अध्यापकों को अब शिक्षा विभाग यह डिप्लोमा नहीं करवाएगा। 1329 अध्यापकों को यह डिप्लोमा अब अपने खर्च पर करना होगा। यह डिप्लोमा छह महीने का है और शिक्षा विभाग ने इसे देखते हुए केंद्र सरकार से इसमें हस्तक्षेप कर समय बढ़ाने की मांग की है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे दिल्ली में हाल में आयोजित हुई नीति आयोग की बैठक में के दौरान केंद्र सरकार के समक्ष रखा है।
उधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन ने बताया कि दिल्ली में आयोजित नीति अयोग की बैठक के दौरान राज्य शिक्षा विभाग के मामलों को रखा गया है। अनुबंध पर लगे जो अध्यापक शिक्षा में डिप्लोमा नहीं कर पाए हैं उनके लिए डिप्लोमा पूरा करने की शर्त को पूरा करने के लिए केंद्र से समय बढ़ाने को कहा गया है।
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