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कैसे पढ़ेंगे प्यारे जब स्कूल हो एक शिक्षक के सहारे

मंडी: हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करवाने के दावे किए जाते हैं लेकिन प्रदेश के अधिकतर स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। अगर स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं तो फिर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मुहैया करवाई जा सकती है।
शिक्षा खंड सदर-2 के तहत आने वाले राजकीय उच्च स्कूल शालानिशार का जिम्मा बीते 1 वर्ष से एक ही शिक्षक के हवाले है।

पी.टी.ए. शास्त्री के हवाले स्कूल 
जो शास्त्री अध्यापिका स्कूल में तैनात है वह भी पी.टी.ए. के तहत रखी गई है। स्कूल प्रबंधन कमेटी के प्रधान हेम सिंह ने कहा है कि स्कूल में एक ही अध्यापिका होने से शिक्षा की हालत को अनुभव किया जा सकता है। सरकार व शिक्षा की अनदेखी के चलते क्षेत्र के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

दर्जा बढ़ा हालात बही
हेम सिंह ने कहा कि करीब 10 वर्षों से माध्यमिक स्कूल था लेकिन बीते वर्ष स्थानीय विधायक व मंत्री ने इसे स्तरोन्नत कर उच्च स्कूल का दर्जा दिया लेकिन सरकार व शिक्षा विभाग स्कूल में दर्जा बढ़ाने के उपरांत शिक्षकों की तैनाती गया, जिसका खमियाजा स्थानीय लोगों के बच्चों को उठाना पड़ रहा है।

ये पद चल रहे रिक्त
स्कूल में कुल 8 शिक्षकों के पद सृजित हैं लेकिन उनमें से मुख्याध्यापक, टी.जी.टी. कला, टी.जी.टी. नॉन मैडीकल, टी.जी.टी. मैडीकल, भाषा अध्यापक, शारीरिक शिक्षक व ड्राइंग शिक्षक सहित 7 पद रिक्त चल रहे हैं।

बच्चे कर रहे पलायन
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते करीब 40 बच्चे क्षेत्र के अन्य स्कूलों में पलायन कर चुके हैं। वर्तमान में स्कूल में करीब 55 बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आ रहे हैं।

बंद किया जाए स्कूल
एस.एम.सी. सहित स्थानीय लोगों ने कहा है कि या तो स्कूल में शिक्षकों की शीघ्र तैनाती की जाए या फिर स्कूल को बंद किया जाए ताकि जो बच्चे स्कूल आ रहे हैं उन्हें भी अन्य स्कूलों में दाखिला करवाया जा सके।
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