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गैर शिक्षक महासंघों की लड़ाई अब मान्यता को लेकर तेज

गैरशिक्षक कर्मचारी महासंघ के जिला स्तर पर दो गुट होने से उनमें अब मान्यता की लड़ाई को लेकर आपसी खींचातान तेज हो गई है। सदस्यता करने के बाद कर्मचारियों को दोनों गुटों ने अपनी अपनी ओर अाकर्षित करके अलग-अलग चुनाव करवा लिए हैं।
मगर अब जेसीसी की बैठक के लिए किसको विभागीय तरजीह मिलती है। इसी पर सभी की निगाहें ठहरी हैं। काबिलेगौर है कि इसी माह 11 सितंबर को हमीरपुर में सोमनाथ जगोटा और 14 सितंबर को राकेश ढटवालिया की देखरेख में दोनों गुटों के चुनाव हुए। जिनमें ये दोनों की कर्मचारी नेता जिला प्रधान भी चुने गए। लेकिन अब उनमें अपने अपने धड़े को सरकार से मान्यता को अपने पाले करने की अंदर खाते कवायद तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जिसके साथ भी जिला स्तर पर जेसीसी की बैठक विभाग कर लेगा, समझ लो उसकी मान्यता पर मोहर लगी है।

सदस्यताका मापतोल शुरू :ब्लाॅक वाइज दोनाें धड़ों ने अपनी अपनी पहुंच के हिसाब से गैर शिक्षक कर्मचारियों काे अपना सदस्य बनाया गया है। इसी बेस पर ब्लॉकों में चुनाव भी करवाए। मगर अब किससे के कितने सदस्य किसके बने हैं और किन किन वर्गांे में से बने हैं। इसका भी मापतोल बना है। साथ में यह भी चर्चा जाेरों पर है कि डिप्टी डायरेक्टर एलीमेंट्री और डिप्टी डायरेक्टर हायर के बड़े कार्यालयों में किसकी ज्यादा मैंबरशिप हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि किस की कितनी ज्यादा पकड़ है।

वहीं सोमनाथ जगोता और महासचिव देशराज भरवाल ने जिला चुनाव के बाद ही दूसरे गुट को शमिल होने का नियोक्ता दिया कि जो लोग इस धारा से अलग चल रहे हैं। उनके लिए शमिल होने के खुले दरवाजे हैं। उनका कहना है कि असल महासंघ हमारा ही है।

संयुक्त चुनाव का ऑफर

एकगुट के प्रधान राकेश ढटवालिया का कहना है कि हमारी अलग चुनाव करवाने की कोई मंशा नहीं थी। कई बार एसएन जगाेता सहित उनके करीबियों को संयुक्त चुनाव करवा लेने का ऑफर दिया था। सदस्यता को रसीदें मांगी तो दी नहीं गई, एक दिन जब फिर बात हुई तो चुनाव तिथियां तय बताईं, एक ब्लॉक में चुनाव तक करवा लिए थे। बाद में जिला स्तर पर संयुक्त चुनाव करवाने का ऑफर दिया, मगर सहमत नहीं हुए, क्यांेकि चुनाव होने थे तो कुछ भी हाथ से खिसक सकता था।

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