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बहुचर्चित भर्ती घोटाला : कल आखिरी तिथि, अब तक दोषी ने नहीं किया आत्मसमर्पण

न्यूजघाट टीम। हमीरपुर हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड की भर्तियों में धांधली के बहुचर्चित मामले में दोषी एमएस कटवाल को सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्तूबर तक सरेंडर करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक कटवाल ने सरेंडर नहीं किया है। मंगलवार सरेंडर करने की अंतिम तिथि है।
यहां तक कि विजीलेंस भी दोषी का पता नहीं लगा पाई है। मामले में अन्य तीन दोषी पहले ही जेल पहुंच चुके हैं।

       बोर्ड की भर्तियों में धांधली के दोषी तत्कालीन बोर्ड सदस्य डा. विद्यानाथ ने 24 सितंबर को कोर्ट में सरेंडर किया था। वहीं दोषी शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा को विजिलेंस ने चंबा और टीजीटी के लिए चयनित मदन गोपाल को विजिलेंस ने ऊना से गिरफ्तार किया था। तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल में भेज दिया गया है। जबकि मामले का चौथा दोषी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर है।

      दोषी एसएम कटवाल को कोर्ट ने पहले 26 सितंबर तक कोर्ट में सरेंडर करने का समय दिया था। बाद में कोर्ट ने अवधि को बढ़ाकर 18 अक्तूबर कर दिया, लेकिन अब तक न तो विजीलेंस की टीमें एसएम कटवाल का सुराग लगा पाई हैं और न ही दोषी ने सरेंडर किया है।

       उधर एएसपी विजीलेंस बलबीर सिंह का कहना है कि दोषी एसएम कटवाल का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। दोषी की धरपकड़ को जगह-जगह छापामारी की जा रही है।

भर्तियों में धांधली का मामला
हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर, अब हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग में वर्ष 2001-02 में सरकारी पदों पर नियुक्तियां के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगे थे। भाजपा सरकार के समय यह भर्तियां हुई थीं और एसएम कटवाल उस समय बोर्ड के चेयरमैन थे। जबकि डा. विद्यानाथ बोर्ड के सदस्य के पद पर नियुक्त थे। वर्ष 2004 में सत्ता बदलते ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस भर्ती मामले की जांच करवाई।

       विजिलेंस ने मामले की जांच कर कोर्ट में चालान पेश किया। इसके बाद सेशन कोर्ट हमीरपुर ने इस मामले में चार लोगों बोर्ड के चेयरमैन एसएम कटवाल, सदस्य डा. विद्यानाथ, शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा और टीजीटी शिक्षक मदन गोपाल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जुलाई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए सेशन कोर्ट का फैसले को सही मानते हुए सजा बरकरार रखी।
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