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कार्मिक नहीं, अब स्वास्थ्य विभाग ही बनाएगा डॉक्टरों की एचआर पॉलिसी

स्वास्थ्यविभाग में कार्यरत डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिस के लिए नए सिरे से एचआर पॉलिसी बनेगी। स्वास्थ्य विभाग खुद एचआर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार करेगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अभी तक कार्मिक विभाग ने राज्य के कर्मचारियों के लिए जो पॉलिसी बनाई है वही पॉलिसी स्वास्थ्य विभाग पर भी लागू होती है।
विभाग ने अब इसमें बदलाव करने का निर्णय लिया है। विभाग का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं अन्य सेवाओं से काफी भिन्न हैं। इसलिए डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ को अन्य कर्मचारियों की तर्ज पर देखना सही नहीं है। राज्य सरकार ने पॉलिसी बनाने को अपनी हामी भर दी है। विभाग जल्द ही इसका ड्राफ्ट तैयार कर लागू करेगा। प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में तैनात स्टाफ के लिए एचआर पॉलिसी बनाई जाएगी। पहले कार्मिक विभाग के नियम ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों पर लागू होते थे। अब इसमें बदलाव किया जाएगा। पॉलिसी का ड्राफ्ट जल्द ही तैयार कर लिया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग में 19,831 पद सृजित है। इनमें 14057 पद भरे हुए हैं। जबकि 5774 पद खाली पड़े हुए हैं। इनमें मेडिकल ऑफिसर के 1909 पद, फार्मासिस्ट के 985, सीनियर लैब असिस्टेंट के 823 रेडियोग्राफर के 207 पद है। शिक्षा और बिजली बोर्ड के बाद स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं।

ट्रांसफर पॉलिसी इसलिए चाहिए सख्त

प्रदेशमें ग्राामीण क्षेत्रों में मौजूद स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी रहती है। स्टाफ यहां जाने के बजाए शहरों के नजदीक स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी एडजस्टमेंट करवा देता है। फ्रेशर को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाता है। ज्यादातर डॉक्टर नौकरी छोड़ कर बाहरी राज्यों का रूख कर लेते हैं। ऐसे में विभाग डॉक्टरों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी में इस तरह की चीजों का ध्यान रखेगा।

इंक्रीमेंट और प्रमोशन

होगी फिक्स

डॉक्टरोंका प्रमोशन चैनल क्या होगा। कितने साल बाद डॉक्टर प्रमोट होंगे, नॉन प्रेक्टिस अलाउंस, ट्रांसफर, इंक्रीमेंट ये सारी चीजें खुद तय की जाएगी। अभी तक कार्मिक विभाग का ही नियम डॉक्टरों पर भी लागू होता है। डॉक्टर और नर्सेस स्टाफ का तर्क रहता है कि उनकी ड्यूटी दिन रात होती है। ऐसे में अन्य कर्मचारियों की भांति प्रमोशन और ट्रांसफर नियमों में छूट होनी चाहिए। स्वास्थ्य महकमा खुद पॉलिसी बनाएगा इसलिए वे इन नियमों में छूट देंगे।

मेडिकल कॉलेजों का

होगा अलग कैडर

प्रदेशमें मौजूदा समय में तीन मैडिकल कॉलेज चल रहे हैं। इसमें आईजीएमसी शिमला, टांडा मैडिकल कॉलेज और नाहन मैडिकल कॉलेज शामिल है। चंबा और हमीरपुर के अलावा ईएसआई मेडिकल कॉलेज नेरचौक भी शुरू हो रहा है। यहां पर डॉक्टर और अन्य स्टाफ का अलग कैडर होगा। डॉक्टरों की तर्ज पर पैरामेडिकल और नर्सेज कैडर भी यहां के लिए अलग किया जा सकता है।

कार्मिक विभाग से वापस लिया जाएगा काम, जल्द बनेगा पॉलिसी का ड्राफ्ट
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