स्कूलों को भेजी गई साइंस-मैथ की किटों का मामला गर्मा गया है। पिछले माह
स्कूलों में हुई इन किटों की सप्लाई की अब शिक्षा विभाग स्टॉक एंट्री मांग
रहा है। यहीं पर अब मामले में पेंच फंस गया है। वजह यह है कि जहां से यह
किटें संबंधित स्कूलों को भेजी गई हैं, उनमें सामान पूरा नहीं है और अब
इसकी स्टाॅक एंट्री संबंधित स्कूलों के गले की फांस बन गई हैं।
सामान इन किटों में लगभग सभी जगह पूरा नहीं है। जब इसकी सप्लाई हुई, तब बंद डिब्बों में स्कूलों को यह थमा दिया गया। अब एक माह के बाद स्टॉक एंट्री जरूरी कह कर इसकी जवाब तलबी ली जा रही है। उधर डिप्टी डायरेक्टर ने इस मामले को लेकर कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच करवाने की हामी भरी है। ताकि इस बात का पता चल सके कि समस्या क्या है, क्या वास्तव में सामान इन किटों में कम था या फिर वेबजह ही हो हल्ला है और यह समस्या आई क्याें ωविवाद कहां से पैदा हुआ। जिस समय यह किटें संबंधित स्कूलों को दी गई थी, उस समय यह सारा सामान उन्होंने जांचा क्यों नहींω।
दरअसल में साइंस-मैथ की इन किटों में कुल आइटम्स 95 दर्शाई गई हैं। लिस्ट के मुताबिक संबंधित हरेक किट में यह सारी संख्या बराबर होनी चाहिए। लेकिन कई किटों में यह पूरी तरह मुकम्मल नहीं है।
ऐसे में स्टॉक एंट्री हो तो कैसेω जिले में ही इन किटों पर लगभग साढ़े 11 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं और यदि इनमें सामान पूरा नहीं है, तो फिर सप्लाई विवादों में तो घिरनी ही है। यह वह मैटीरियल है, जो साइंस फेयर के लिए भी मॉडल मेकिंग में काम आता है। हरेक स्कूल को यह सप्लाई हजारों में रहती है।
प्रिंसिपल से करेंगे बात
डिप्टीडायरेक्टर एलीमेंट्री रवित चंद कटोच का कहना है कि स्टॉक एंट्री को लेकर जो मामला सामने आया है, उसके लिए एसएसए के प्रिंसिपल से बात की जाएगी और फिर एक कमेटी गठित कर स्कूलों में वे स्टॉक एंट्री से संबंधित इस मामले को जांचेगी, तभी पता चलेगा कि इसमें सच्चाई कितनी है, लेकिन उनका यह भी कहना था कि जिस समय यह किटें संबंधित स्कूलों को आवंटित हुई थीं, यह उन्हीं की जिम्मेदारी है कि वे संबंधित डिब्बों में कुल 95 आइटम्स को जांच लेते।
किसने की सप्लाई
यहसप्लाई हिमाचल खादी एवं ग्रामोद्योग की मार्फत हुई है। दरअसल में यह सप्लाई पूरे हिमाचल में ही सभी जिलों में इसी तरह के मॉडल्स को बनाने के लिए किटों के रूप में हुई है और छानबीन से पता यही चला है कि लगभग सभी जिलों में यह समस्या मुंह फुला कर ऐसे खड़ी हो गई है, जिससे संबंधित स्कूलों के बीआरसी अब परेशान हैं। वे स्टॉक एंट्री मुहैया करवाने में असमर्थ हो रहे हैं। हमीरपुर जिले में तो कमेटी गठित करने की बात डिप्टी डायरेक्टर कर रहे हैं, बाकी जिलों की हालत क्या होगी, इसका पता तो बाद में ही चलेगा, लेकिन हरेक जिले में लाखों रुपए के इस बजट पर सवाल उठने लाजिमी हैं। व्यवस्थागत खामियों की वजह से यह परेशानी हुई है, क्योंकि जिला स्तर पर जब इन किटों की आपूर्ति हुई है, तो उस समय कमेटी गठित कर इन्हें जांचा क्यों नहीं गया। हमीरपुर जिला में गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल कुल 13 ऐसे हैं, जिनमें क्लस्टर लैवल पर इन सभी को तीन-तीन किटें दी गई हैं।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
सामान इन किटों में लगभग सभी जगह पूरा नहीं है। जब इसकी सप्लाई हुई, तब बंद डिब्बों में स्कूलों को यह थमा दिया गया। अब एक माह के बाद स्टॉक एंट्री जरूरी कह कर इसकी जवाब तलबी ली जा रही है। उधर डिप्टी डायरेक्टर ने इस मामले को लेकर कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच करवाने की हामी भरी है। ताकि इस बात का पता चल सके कि समस्या क्या है, क्या वास्तव में सामान इन किटों में कम था या फिर वेबजह ही हो हल्ला है और यह समस्या आई क्याें ωविवाद कहां से पैदा हुआ। जिस समय यह किटें संबंधित स्कूलों को दी गई थी, उस समय यह सारा सामान उन्होंने जांचा क्यों नहींω।
दरअसल में साइंस-मैथ की इन किटों में कुल आइटम्स 95 दर्शाई गई हैं। लिस्ट के मुताबिक संबंधित हरेक किट में यह सारी संख्या बराबर होनी चाहिए। लेकिन कई किटों में यह पूरी तरह मुकम्मल नहीं है।
ऐसे में स्टॉक एंट्री हो तो कैसेω जिले में ही इन किटों पर लगभग साढ़े 11 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं और यदि इनमें सामान पूरा नहीं है, तो फिर सप्लाई विवादों में तो घिरनी ही है। यह वह मैटीरियल है, जो साइंस फेयर के लिए भी मॉडल मेकिंग में काम आता है। हरेक स्कूल को यह सप्लाई हजारों में रहती है।
प्रिंसिपल से करेंगे बात
डिप्टीडायरेक्टर एलीमेंट्री रवित चंद कटोच का कहना है कि स्टॉक एंट्री को लेकर जो मामला सामने आया है, उसके लिए एसएसए के प्रिंसिपल से बात की जाएगी और फिर एक कमेटी गठित कर स्कूलों में वे स्टॉक एंट्री से संबंधित इस मामले को जांचेगी, तभी पता चलेगा कि इसमें सच्चाई कितनी है, लेकिन उनका यह भी कहना था कि जिस समय यह किटें संबंधित स्कूलों को आवंटित हुई थीं, यह उन्हीं की जिम्मेदारी है कि वे संबंधित डिब्बों में कुल 95 आइटम्स को जांच लेते।
किसने की सप्लाई
यहसप्लाई हिमाचल खादी एवं ग्रामोद्योग की मार्फत हुई है। दरअसल में यह सप्लाई पूरे हिमाचल में ही सभी जिलों में इसी तरह के मॉडल्स को बनाने के लिए किटों के रूप में हुई है और छानबीन से पता यही चला है कि लगभग सभी जिलों में यह समस्या मुंह फुला कर ऐसे खड़ी हो गई है, जिससे संबंधित स्कूलों के बीआरसी अब परेशान हैं। वे स्टॉक एंट्री मुहैया करवाने में असमर्थ हो रहे हैं। हमीरपुर जिले में तो कमेटी गठित करने की बात डिप्टी डायरेक्टर कर रहे हैं, बाकी जिलों की हालत क्या होगी, इसका पता तो बाद में ही चलेगा, लेकिन हरेक जिले में लाखों रुपए के इस बजट पर सवाल उठने लाजिमी हैं। व्यवस्थागत खामियों की वजह से यह परेशानी हुई है, क्योंकि जिला स्तर पर जब इन किटों की आपूर्ति हुई है, तो उस समय कमेटी गठित कर इन्हें जांचा क्यों नहीं गया। हमीरपुर जिला में गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल कुल 13 ऐसे हैं, जिनमें क्लस्टर लैवल पर इन सभी को तीन-तीन किटें दी गई हैं।
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