एकतरफ सरकार राज्य में शिक्षा क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत रहने के
दावे कर रही है और वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षकों के बराबर कमी है।
ऐसे ही स्कूलों में बाहली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भी शामिल है, जहां
शिक्षकों का टोटा है। इस स्कूल में शिक्षकों के कुल 11 पद खाली है
और छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित है। वहीं, स्कूल प्रबंधन समिति ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि अगर सरकार ने तुरंत शिक्षकों के पद भरे तो स्कूल में ताला जड़ दिया जाएगा।
स्कूलमें शिक्षक नही बच्चों का भविष्य अधर में
स्कूलसमिति के अध्यक्ष कमलेश शर्मा ने कहा कि यहां पर पढ़ रहे बच्चों का भविष्य अधर में है। आधा सत्र बीत गया है लेकिन यहां पर अहम विषयों के शिक्षक ही नहीं है। स्कूल में पीजीटी इंग्लिश, इतिहास, राजनीतिक शास्त्र, अर्थ शास्त्र के शिक्षकों के पद खाली है। हैरानी की बात है कि इस स्कूल में प्रधानाचार्य का पद तक रिक्त चल रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति ने कहा कि इन पदों के अलावा पीजीटी समाज शास्त्र का पद भी प्रतिनियुक्ति के कारण रिक्त पड़ा है। वहीं, चार पद गैर शिक्षक कर्मचारियों के रिक्त चल रहे है। ऐसे में यहां पर शिक्षक सहित गैर शिक्षक के कई अहम पद रिक्त चल रहे है। स्थिति ये है कि स्कूल में अधीक्षक सहित वरिष्ठ सहायक तक के पद रिक्त पड़े है। स्कूल से संबंधित किसी भी कार्यालय काम के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।अभिभावकों ने कहा है कि अगर अब भी सरकार शिक्षाक विभाग स्कूल में शिक्षकों की तैनाती नहीं करती है तो वह इस संबंध में कड़ा रूख अतियार करेगें। इतना ही नहीं एसएमसी ने कहा है कि खाली पदों को शीघ्र भरा जाए नहीं तो वह स्कूल में ताला जड़ देगें।
प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में स्कूलों का जाल तो बिछा दिया लेकिन कई स्कूलों में अभी तक शिक्षकों की कमी चल रही है। यही हाल रामपुर और ननखड़ी स्कूलों में है। जहां सरकार ने स्कूल तो खोल दिए है, लेकिन शिक्षकों की तैनाती करना भुल गया है। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को भुगतना पढ़ रहा है। वहीं, भाजपा के पूर्व प्रत्याशी प्रेम सिंह द्रैक ने कहा है कि शिक्षा के स्तर को सुदृढ़ करने के लिए सरकार स्कूलों को खोलने के साथ-साथ शिक्षकों की तैनाती की पूरी व्यवस्था करे, तभी स्कूलों को खोलने का महत्व रहता है, जबकि रामपुर और ननखड़ी में शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसी व्यवस्था से जहां बच्चों की पढ़ाई पर असर पढ़ रहो है वहीं अभिभावकों में चिंता है।
प्रदेश सरकार एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारने के बड़े बड़े दावे कर रही है, लेकिन रामपुर खंड के बाहली स्कूल में प्रधानाचार्य सहित अहम विषयों के अध्यापकों के पद बीते कई वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन इन पदों को भरने में शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार नाकाम साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि बाहली स्कूल में पहले से ही शिक्षकों के कई पद रिक्त पड़े है ऐसे में इस स्कूल के समाज शास्त्र के शिक्षकों को डेपूटेशन में मझेवटी स्कूल में भेजा गया है। जबकि उक्त शिक्षक नौकरी तो मझेवटी स्कूल में कर रहा है और तनख्वाह अभी भी बाहली स्कूल से ही मिली है। शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य को लेेकर चिंता सता रही है। स्कूल से करीब एक दर्जन छात्र छात्राएं दूसरे स्कूलों का पलायन कर चुके हैं।
^बाहली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में शिक्षकों और गैर शिक्षकों के15 पद खाली है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कमलेशशर्मा , अध्यक्ष स्कूल प्रबंधन समिति बाहली स्कूल।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
और छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित है। वहीं, स्कूल प्रबंधन समिति ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि अगर सरकार ने तुरंत शिक्षकों के पद भरे तो स्कूल में ताला जड़ दिया जाएगा।
स्कूलमें शिक्षक नही बच्चों का भविष्य अधर में
स्कूलसमिति के अध्यक्ष कमलेश शर्मा ने कहा कि यहां पर पढ़ रहे बच्चों का भविष्य अधर में है। आधा सत्र बीत गया है लेकिन यहां पर अहम विषयों के शिक्षक ही नहीं है। स्कूल में पीजीटी इंग्लिश, इतिहास, राजनीतिक शास्त्र, अर्थ शास्त्र के शिक्षकों के पद खाली है। हैरानी की बात है कि इस स्कूल में प्रधानाचार्य का पद तक रिक्त चल रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति ने कहा कि इन पदों के अलावा पीजीटी समाज शास्त्र का पद भी प्रतिनियुक्ति के कारण रिक्त पड़ा है। वहीं, चार पद गैर शिक्षक कर्मचारियों के रिक्त चल रहे है। ऐसे में यहां पर शिक्षक सहित गैर शिक्षक के कई अहम पद रिक्त चल रहे है। स्थिति ये है कि स्कूल में अधीक्षक सहित वरिष्ठ सहायक तक के पद रिक्त पड़े है। स्कूल से संबंधित किसी भी कार्यालय काम के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।अभिभावकों ने कहा है कि अगर अब भी सरकार शिक्षाक विभाग स्कूल में शिक्षकों की तैनाती नहीं करती है तो वह इस संबंध में कड़ा रूख अतियार करेगें। इतना ही नहीं एसएमसी ने कहा है कि खाली पदों को शीघ्र भरा जाए नहीं तो वह स्कूल में ताला जड़ देगें।
प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में स्कूलों का जाल तो बिछा दिया लेकिन कई स्कूलों में अभी तक शिक्षकों की कमी चल रही है। यही हाल रामपुर और ननखड़ी स्कूलों में है। जहां सरकार ने स्कूल तो खोल दिए है, लेकिन शिक्षकों की तैनाती करना भुल गया है। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को भुगतना पढ़ रहा है। वहीं, भाजपा के पूर्व प्रत्याशी प्रेम सिंह द्रैक ने कहा है कि शिक्षा के स्तर को सुदृढ़ करने के लिए सरकार स्कूलों को खोलने के साथ-साथ शिक्षकों की तैनाती की पूरी व्यवस्था करे, तभी स्कूलों को खोलने का महत्व रहता है, जबकि रामपुर और ननखड़ी में शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसी व्यवस्था से जहां बच्चों की पढ़ाई पर असर पढ़ रहो है वहीं अभिभावकों में चिंता है।
प्रदेश सरकार एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारने के बड़े बड़े दावे कर रही है, लेकिन रामपुर खंड के बाहली स्कूल में प्रधानाचार्य सहित अहम विषयों के अध्यापकों के पद बीते कई वर्षों से रिक्त पड़े हैं, लेकिन इन पदों को भरने में शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार नाकाम साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि बाहली स्कूल में पहले से ही शिक्षकों के कई पद रिक्त पड़े है ऐसे में इस स्कूल के समाज शास्त्र के शिक्षकों को डेपूटेशन में मझेवटी स्कूल में भेजा गया है। जबकि उक्त शिक्षक नौकरी तो मझेवटी स्कूल में कर रहा है और तनख्वाह अभी भी बाहली स्कूल से ही मिली है। शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य को लेेकर चिंता सता रही है। स्कूल से करीब एक दर्जन छात्र छात्राएं दूसरे स्कूलों का पलायन कर चुके हैं।
^बाहली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में शिक्षकों और गैर शिक्षकों के15 पद खाली है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कमलेशशर्मा , अध्यक्ष स्कूल प्रबंधन समिति बाहली स्कूल।
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