राज्य ब्यूरो, शिमला : सरकारी स्कूलों के
बच्चों को यूएस एंबेसी अंग्रेजी सिखाएगी। यूएस स्टेट इंग्लिश प्रमोशन
प्रोग्राम प्रदेश के तीन स्कूलों में शुरू हो गया है। इसके तहत बच्चों को
अंग्रेजी पढ़नी, बोलनी और लिखनी सिखाई जाएगी। पहले चरण में राजधानी शिमला
के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय पोर्टमोर, छोटा शिमला और
टूटीकंडी में अंग्रेजी पढ़ानी शुरू कर दी गई है।
इसके लिए अमेरिका ही पूरा खर्च उठा रहा है। अमेरिका सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रही एलएलएफ कंपनी को इसका जिम्मा दिया है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट का अंग्रेजी के लिए प्रोग्राम है। इसका कोर्स दो साल का है। भारत में बच्चों की अंग्रेजी की नींव को मजबूत करने के लिए अमेरकिा ने कदम उठाया है। खासकर आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए सुविधा दी जा रही है। इनकी उम्र 13 से 20 साल हो, अलग-अलग गतिविधियों से इनके अंग्रेजी के कौशल को बढ़ाया जाएगा। तीन स्कूलों में करीब डेढ़ सौ बच्चे अंग्रेजी की कक्षाएं लगा रहे हैं। इनमें से श्रेष्ठ रहने वाले दो विद्यार्थियों को एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए अमेरिका भेजा जाएगा।
एक हजार डॉलर की किताबें व किट
एक बच्चे को करीब एक हजार अमेरिकी डॉलर की किताबें व किट मिली हैं। इसमें ऑडियो, वीडियो सीडी के अतिरिक्त किताबें हैं। किट में मूल्यांकन शीट 'खुद ही पढ़ो खुद ही जान जाओ' है। इससे बच्चे नियमित तौर पर इस्तेमाल होने वाले अंग्रेजी के वाक्य बोल सकेंगे। इन क्लास रूम में ¨हदी का प्रयोग करने की मनाही है। डेढ़ घंटे की क्लास में अंग्रेजी भाषा में ही बात कर सकते हैं। इन प्रोग्राम के तहत शिक्षक भी अलग से नियुक्त गए हैं।
अव्वल विद्यार्थियों का होता है चयन
स्कूल के सभी बच्चों को इस प्रोग्राम के तहत नहीं पढ़ाया जा रहा है। कोर्स शुरू होने से पहले यूएस सरकार उनका अंग्रेजी का पेपर लेती है। इसमें अव्वल विद्यार्थी का चयन किया गया है। यह प्रोग्राम पहले दिल्ली के स्कूलों में शुरू हुआ है।
यूएस एंबेसी ने यह प्रोग्राम शुरू किया है, जिसे एलएलएफ देख रहा है। तीन स्कूलों में यदि कार्यक्रम सफल रहता है, तो अगले साल प्रदेश के अन्य स्कूलों में भी शुरू किया जाएगा। इन तीन स्कूलों में से दो बच्चे यूएस भी जाएंगे।
- घनश्याम चंद, राज्य परियोजना निदेशक, सर्वशिक्षा अभियान।
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इसके लिए अमेरिका ही पूरा खर्च उठा रहा है। अमेरिका सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रही एलएलएफ कंपनी को इसका जिम्मा दिया है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट का अंग्रेजी के लिए प्रोग्राम है। इसका कोर्स दो साल का है। भारत में बच्चों की अंग्रेजी की नींव को मजबूत करने के लिए अमेरकिा ने कदम उठाया है। खासकर आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए सुविधा दी जा रही है। इनकी उम्र 13 से 20 साल हो, अलग-अलग गतिविधियों से इनके अंग्रेजी के कौशल को बढ़ाया जाएगा। तीन स्कूलों में करीब डेढ़ सौ बच्चे अंग्रेजी की कक्षाएं लगा रहे हैं। इनमें से श्रेष्ठ रहने वाले दो विद्यार्थियों को एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए अमेरिका भेजा जाएगा।
एक हजार डॉलर की किताबें व किट
एक बच्चे को करीब एक हजार अमेरिकी डॉलर की किताबें व किट मिली हैं। इसमें ऑडियो, वीडियो सीडी के अतिरिक्त किताबें हैं। किट में मूल्यांकन शीट 'खुद ही पढ़ो खुद ही जान जाओ' है। इससे बच्चे नियमित तौर पर इस्तेमाल होने वाले अंग्रेजी के वाक्य बोल सकेंगे। इन क्लास रूम में ¨हदी का प्रयोग करने की मनाही है। डेढ़ घंटे की क्लास में अंग्रेजी भाषा में ही बात कर सकते हैं। इन प्रोग्राम के तहत शिक्षक भी अलग से नियुक्त गए हैं।
अव्वल विद्यार्थियों का होता है चयन
स्कूल के सभी बच्चों को इस प्रोग्राम के तहत नहीं पढ़ाया जा रहा है। कोर्स शुरू होने से पहले यूएस सरकार उनका अंग्रेजी का पेपर लेती है। इसमें अव्वल विद्यार्थी का चयन किया गया है। यह प्रोग्राम पहले दिल्ली के स्कूलों में शुरू हुआ है।
यूएस एंबेसी ने यह प्रोग्राम शुरू किया है, जिसे एलएलएफ देख रहा है। तीन स्कूलों में यदि कार्यक्रम सफल रहता है, तो अगले साल प्रदेश के अन्य स्कूलों में भी शुरू किया जाएगा। इन तीन स्कूलों में से दो बच्चे यूएस भी जाएंगे।
- घनश्याम चंद, राज्य परियोजना निदेशक, सर्वशिक्षा अभियान।