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कंप्यूटर शिक्षकों को निकालने की निंदा

भारत की जनवादी नौजवान सभा राज्य सचिवालय ने शिक्षा विभाग के की ओर से जारी आदेशों की कड़े शब्दों में निंदा की है। जिसमें उन्होंने 1458 कंप्यूटर शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया है। ये कंप्यूटर शिक्षक पिछले 15 वर्षों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे है।
अलग कंपनियों के माध्यम से इनको रखा गया। सभा के राज्य कमेटी सचिव कपिल भारद्वाज ने कहा कि कंपनियों ने सरकार से पैसा लेकर कुछ पैसा इन अध्यापकों को सैलरी के रूप में दिया तथा बाकी कमीशन के रूप में रख लिया। जिसके कारण इनका शोषण होता रहा है।

प्रदेश में जितनी कंपनियां लोगों को सरकारी दफ्तरों में ठेके में काम दे रही है वो उन सभी नौजवानों का इसी तरह शोषण रही है। यह प्रदेश के पढ़े लिखे नौजवानों के साथ अन्याय है। ये कांग्रेस भाजपा दोनों की सरकारों में हो रहा है। जो निजी कंपनियों की ज्यादा हितैशी और प्रदेश के नौजवानों को लूटने की खुली छूट दे रही है। कंप्यूटर अध्यापक पिछले पांच महीने से अपनी जायज मांगों को लेकर लड़ रहे है। परंतु वीरभद्र सरकार पर कोई असर नहीं है। यह सरकार प्रदेश में मजदूरों, अध्यापकों, किसानों अन्य मेहनतकश जनता के आंदोलनों को कुचलने की भरपूर कोशिश कर रही है। विभागों कंपनियों को जायज मांगों को मनवाने के लिए दबाव डाल रही है। भारत की जनवादी नौजवान सभा ने सरकार से मांग उठाई कि शिक्षा विभाग कंप्यूटर अध्यापकों की बरखास्तगी का फैसला तुरंत वापिस लें और इनकी नौकरी बहाल करे। पार्टी कंप्यूटर अध्यापकों के आंदोलन को समर्थन देती है पूरा सहयोग देगी ताकि आंदोलन सफल हा़े सके। 

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