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प्रतिबंध के बावजूद सरकारी शिक्षक पढ़ा रहे ट्यूशन!

बरठीं: बिलासपुर जिले के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अध्यापक स्कूलों में छुट्टी के बाद व सुबह स्कूल समय से पहले अपने ही स्कूल के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के गोरखधंधे को प्रशासन व विभाग की नाक तले अंजाम देकर विभागीय मापदंडों को तार-तार कर रहे हैं।
हैरान करने वाली बात तो यह है कि जिला के नामी कस्बों बरठीं व झंडूता में कई अध्यापकों द्वारा पिछले लंबे समय से ट्यूशन रूपी दुकानदारी करके सरेआम चांदी कूटी जा रही है और इन्हें पूछने वाला कोई नहीं है।

बेरोजगार युवाओं को ट्यूशन रूपी रोजगार
झंडूता व बरठीं क्षेत्र के बुद्धिजीवियों रामस्वरूप, मान चंद, राम प्रकाश, विरेंद्र, सुनील, कपिल, ज्ञान चंद, कश्मीर, करतार सिंह, जगन्नाथ, जगदीश, बिशन सिंह, रविंद्र व रतन कुमार इत्यादि का कहना है कि वे ट्यूशन के खिलाफ नहीं है लेकिन उनके गांवों में कई ऐसे युवा व युवतियां हैं जो हाथों में डिग्रियां लेकर रोजगार के लिए देश-प्रदेश में दिन -रात धक्के खा रहे हैं। इन सरकारी स्कूलों के अध्यापक ट्यूशन रूपी गोरखधंधे को कहीं चोरी छिपे तथा कहीं सरेआम अंजाम देना बंद करके ऐसे बेरोजगार युवाओं को ट्यूशन रूपी रोजगार से चार पैसे कमाने का मौका दें जिन्होंने डिग्रियां हासिल करने पर लाखों रुपए खर्च कर दिए हैं लेकिन आज बेरोजगारी के मारे अपने परिजनों व समाज के सामने आंखे ऊपर करके बात तक करने में शर्म महसूस कर रहे हैं।

प्रतिबंध के बावजूद बच्चों पढ़ाते हैं अध्यापक  
प्रतिबंध के बावजूद अध्यापकों द्वारा इस ट्यूशन रूपी गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अब सरकारी स्कूलों में केवल गरीबों के ही बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मध्यम वर्ग व अमीर लोगों के बच्चे वी.आई.पी. निजी स्कूलों में अपना भविष्य संवार रहे हैं। सरकारी स्कूलों के अध्यापकों द्वारा ट्यूशन के लालच में स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी ही समाप्त होती जा रही है और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने का यही मुख्य कारण है।

वेतन के अलावा मोटी कमाई कर रहे अध्यापकों   
लोगों का कहना है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां इनके परिजन पढ़े लिखे डिग्री होल्डर हैं और उनकी आड़ में अध्यापक खुलकर ट्यूशन पढ़ाने को अंजाम दे रहे हैं। इस समस्या के बारे में कई बार विभाग व प्रशासन से मौखिक व लिखित शिकायतें भी की गई लेकिन कभी कार्रवाई न होना साफ इंगित करता है कि कहीं न कहीं इस ट्यूशन माफिया को विभागीय संरक्षण प्राप्त है। सूत्र बताते हैं कि इस ट्यूशन के धंधे से सरकारी अध्यापक वेतन के अलावा मोटी कमाई कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि छोटी कक्षा के बच्चों से 300 रुपए प्रति विषय तथा बड़ी कक्षा के बच्चों से 500 रुपए प्रति विषय फीस वसूली जाती है।

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