शिमला. राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात पैट, पीटीए, पैरा और ग्रामीण विद्या उपासकों के मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट डबल बैंच में होगी। वर्ष 2015 से ये मामला सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार बेंच में चला हुआ था जिसे अब डबल बैंच में शिफ्ट कर दिया गया है। इस मामले की सुनवाई 5 जनवरी से शुरू होगी।
राज्य के हजारों शिक्षकों का भविष्य इस केस से जुड़ा हुआ है। शिक्षकों को उम्मीद है कि नए साल में उनको बड़ी राहत मिलेगी। राज्य सरकार ने अस्थाई तौर पर पीटीए, पैरा, पैट और ग्रामीण विद्या उपासकों की नियुक्तियां की। पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इन्हें मुख्यधारा में लाना शुरू किया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
ये हो रहा है नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण शिक्षकों के नियमितिकरण अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार ने रोक लगाई हुई है। शिक्षक पिछले काफी समय से राज्य सरकार से सशर्त रेगुलराइज करने की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट शिक्षकों के हक में फैसला सुनाता है तो इन शिक्षकों के नियमित होने का रास्ता साफ हो जाएगा। यदि इनके विरुद्ध फैसला आता है तो इन्हें नौकरी से हटाया जा सकता है।
6500 पीटीए, 2200 पैरा, 3400 पैट अौर 1500 विद्या उपासक
राज्यके सरकारी स्कूलों में करीब 13500 शिक्षक अस्थाई तौर पर तैनात हैं। इनमें 6500 पीटीए हैं। इसके अलावा पैरा 2200, पैट 3400, ग्रामीण विद्या उपासक 1500 के करीब हैं। हालांकि साढ़े तीन हजार से ज्यादा पीटीए को अनुबंध पर ला दिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जो केस है उसके अनुसार इन्हें अस्थाई ही माना जाएगा। इसके अलावा 3408 पैट, 2200 के करीब पैरा और 1600 के करीब ग्रामीण विद्या उपासक शिक्षक शामिल है। पीटीए शिक्षक संघ के अध्यक्ष विवेक मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। शिक्षकों को पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उनके हक में फैसला आएगा। इस केस की लड़ाई पिछले पांच सालों से लड़ रहे हैं।
राज्य के हजारों शिक्षकों का भविष्य इस केस से जुड़ा हुआ है। शिक्षकों को उम्मीद है कि नए साल में उनको बड़ी राहत मिलेगी। राज्य सरकार ने अस्थाई तौर पर पीटीए, पैरा, पैट और ग्रामीण विद्या उपासकों की नियुक्तियां की। पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इन्हें मुख्यधारा में लाना शुरू किया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
ये हो रहा है नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण शिक्षकों के नियमितिकरण अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार ने रोक लगाई हुई है। शिक्षक पिछले काफी समय से राज्य सरकार से सशर्त रेगुलराइज करने की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट शिक्षकों के हक में फैसला सुनाता है तो इन शिक्षकों के नियमित होने का रास्ता साफ हो जाएगा। यदि इनके विरुद्ध फैसला आता है तो इन्हें नौकरी से हटाया जा सकता है।
6500 पीटीए, 2200 पैरा, 3400 पैट अौर 1500 विद्या उपासक
राज्यके सरकारी स्कूलों में करीब 13500 शिक्षक अस्थाई तौर पर तैनात हैं। इनमें 6500 पीटीए हैं। इसके अलावा पैरा 2200, पैट 3400, ग्रामीण विद्या उपासक 1500 के करीब हैं। हालांकि साढ़े तीन हजार से ज्यादा पीटीए को अनुबंध पर ला दिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जो केस है उसके अनुसार इन्हें अस्थाई ही माना जाएगा। इसके अलावा 3408 पैट, 2200 के करीब पैरा और 1600 के करीब ग्रामीण विद्या उपासक शिक्षक शामिल है। पीटीए शिक्षक संघ के अध्यक्ष विवेक मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। शिक्षकों को पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उनके हक में फैसला आएगा। इस केस की लड़ाई पिछले पांच सालों से लड़ रहे हैं।