एजुकेशनरिपोर्टर | शिमला पूर्व वीसी प्रो. एडीएन वाजपेयी के कार्यकाल में हुई शिक्षक भर्ती मामले
में हो रही जांच में एचपीयू के कई विभाग सवालाें के घेरे में हैं।
केंद्रीय विजिलेंस कमिशन ने राज्य सरकार को जो जांच के आदेश दिए गए हैं,
उसमें हिंदी लाइफ लर्निंग विभाग भी जांच के दायरे में आए हैं।
ऐसे में इन विभागों में हुई अस्सिटेंट प्रोफेसर भर्ती मामले में जांच होना लगभग तय हैं। हिंदी विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती का मामले की जांच के लिए पहले भी कुछ अभ्यर्थियों ने राज्यपाल से जांच की गुहार लगाई थी। जबकि अभी तक इस पर किसी तरह की जांच नहीं हुई थी। इसी तरह लाइफ लर्निंग में अर्थशास्त्र सहायक आचार्य पद पर दी गई नियुक्ति पर भी छात्र संगठन एबीवीपी, एसएफआई ने सवाल खड़े किए थे।
एडीएन वाजपेयी पूर्ववीसी एचपीयू
लाइफ लर्निंग..ये आरोप
1.इसविभाग में टेलीशीट को बाईपास कर अलग से नियम बनाकर अभ्यर्थी को लाभ देने का आरोप है। इस पर विवि में छात्र संगठनों ने खूब हंगामा भी किया था।
2.आरोपहै कि विवि प्रशासन ने टेलीशीट में जरूरी एकेडमिक नियमों को दरकिनार कर नए नियम बनाए थे। टेलीशीट में जहां एकेडमिक परफॉर्मेंस 80 नंबर के, वहीं साक्षात्कार 20 नंबर के रखे जाते हैं।
3.जबकिविवि प्रशासन ने इसे दरकिनार करते हुए अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए पांच वर्ष का अनुभव को भर्ती के लिए पात्रता रख दिया। यानि की टेलीशीट के नियमों को दरकिनार कर दिया।
4.यहभी आरोप है कि विवि प्रशासन ने सिर्फ दो अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया। नियम के तहत एक पद के लिए तीन अभ्यर्थियों जरूरी हैं।
5.यूजीसीके नियमाें में साफ है कि टेलीशीट के नियम को भर्ती के लिए हर हाल में अपनाना होता है। अपने तरीके से किसी तरह के नए नियम नहीं बनाए जा सकते हैं।
हिंदी विभाग.. ये आरोप
1.कुछअभ्यर्थियों ने आरटीआई में जानकारी ली थी कि जिस अभ्यर्थी को विवि ने नियुक्ति दी है उसने वर्ष 2012 में सहायक आचार्य के पद के लिए एससी कैटेगरी से फार्म भरा था।
2.जबकिस्क्रीनिंग कमेटी ने इसके फार्म को रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थी ने एप्लीकेशन फार्म जनरल कैटेगरी में भरा। जबकि उसने नेट एससी कैटेगरी में पास किया है।
3.जनरलकैटेगरी में अभ्यर्थी 15वें स्थान पर थे। इसके अलावा यूजीसी की पोस्ट डॉक्टेरल फैलोशिप फाॅर वुमन की लिस्ट में भी अभ्यर्थी ने अपने आप को एससी कैटेगरी में दर्शाया है।
4.यानिकी यूजीसी के हर सर्टिफिकेट में वह एससी कैटेगरी से हैं। इसके बावजूद भी विवि ने अभ्यर्थी को नियुक्ति दे दी। ऐसे में इस विभाग की भर्ती भी अब जांच के दायरे में गई हैं।
5.एकअभ्यर्थी ने तो पूरे दस्तावेज के साथ राज्यपाल को भी इस बाबत शिकायत दी थी। आरोप था कि विवि प्रशासन ने अपने चहेते को नियुक्ति दी हैं।
ऐसे में इन विभागों में हुई अस्सिटेंट प्रोफेसर भर्ती मामले में जांच होना लगभग तय हैं। हिंदी विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती का मामले की जांच के लिए पहले भी कुछ अभ्यर्थियों ने राज्यपाल से जांच की गुहार लगाई थी। जबकि अभी तक इस पर किसी तरह की जांच नहीं हुई थी। इसी तरह लाइफ लर्निंग में अर्थशास्त्र सहायक आचार्य पद पर दी गई नियुक्ति पर भी छात्र संगठन एबीवीपी, एसएफआई ने सवाल खड़े किए थे।
एडीएन वाजपेयी पूर्ववीसी एचपीयू
लाइफ लर्निंग..ये आरोप
1.इसविभाग में टेलीशीट को बाईपास कर अलग से नियम बनाकर अभ्यर्थी को लाभ देने का आरोप है। इस पर विवि में छात्र संगठनों ने खूब हंगामा भी किया था।
2.आरोपहै कि विवि प्रशासन ने टेलीशीट में जरूरी एकेडमिक नियमों को दरकिनार कर नए नियम बनाए थे। टेलीशीट में जहां एकेडमिक परफॉर्मेंस 80 नंबर के, वहीं साक्षात्कार 20 नंबर के रखे जाते हैं।
3.जबकिविवि प्रशासन ने इसे दरकिनार करते हुए अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए पांच वर्ष का अनुभव को भर्ती के लिए पात्रता रख दिया। यानि की टेलीशीट के नियमों को दरकिनार कर दिया।
4.यहभी आरोप है कि विवि प्रशासन ने सिर्फ दो अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया। नियम के तहत एक पद के लिए तीन अभ्यर्थियों जरूरी हैं।
5.यूजीसीके नियमाें में साफ है कि टेलीशीट के नियम को भर्ती के लिए हर हाल में अपनाना होता है। अपने तरीके से किसी तरह के नए नियम नहीं बनाए जा सकते हैं।
हिंदी विभाग.. ये आरोप
1.कुछअभ्यर्थियों ने आरटीआई में जानकारी ली थी कि जिस अभ्यर्थी को विवि ने नियुक्ति दी है उसने वर्ष 2012 में सहायक आचार्य के पद के लिए एससी कैटेगरी से फार्म भरा था।
2.जबकिस्क्रीनिंग कमेटी ने इसके फार्म को रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थी ने एप्लीकेशन फार्म जनरल कैटेगरी में भरा। जबकि उसने नेट एससी कैटेगरी में पास किया है।
3.जनरलकैटेगरी में अभ्यर्थी 15वें स्थान पर थे। इसके अलावा यूजीसी की पोस्ट डॉक्टेरल फैलोशिप फाॅर वुमन की लिस्ट में भी अभ्यर्थी ने अपने आप को एससी कैटेगरी में दर्शाया है।
4.यानिकी यूजीसी के हर सर्टिफिकेट में वह एससी कैटेगरी से हैं। इसके बावजूद भी विवि ने अभ्यर्थी को नियुक्ति दे दी। ऐसे में इस विभाग की भर्ती भी अब जांच के दायरे में गई हैं।
5.एकअभ्यर्थी ने तो पूरे दस्तावेज के साथ राज्यपाल को भी इस बाबत शिकायत दी थी। आरोप था कि विवि प्रशासन ने अपने चहेते को नियुक्ति दी हैं।