जागरण संवाददाता, ऊना : मांगें पूरी न होने पर विशेष बच्चों के शिक्षक
सरकार से नाराज हैं। विशेष शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष चरनजीत भट्टी ने
कहा कि सामान्य बच्चों को हर अध्यापक पढ़ा लेता है लेकिन मंदबुद्धि, चलने
में, बोलने में, देखने में, सुनने में असमर्थ और घरों में चारपाई पर पड़े
बच्चों को पढ़ाने का काम स्पेशल एजुकेटर करते हैं।
सरकार ने दस साल पहले
स्पेशल एजुकेटर को एसएसए में तैनात किया था जिनके पास इन बच्चों को पढ़ाने
के लिए अलग से डिप्लोमा डिग्री थी। ये अध्यापक 8910 रुपये वेतनमान पर रखे
गए हैं जो घरों से 200 किलोमीटर दूर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि
वर्ष 2010 में जब उन्हें तैनात किया गया था तब दिव्यांग बच्चों की सरकारी
स्कूलों में संख्या 2500 थी और आज बच्चों की संख्या 13000 है। इन बच्चों का
घरों में सर्वे करने के बाद दाखिला सरकारी स्कूलों में बढ़ा है। ये
अध्यापक उन बच्चों को भी पढ़ाते है जो पढ़ने में कमजोर हैं जिन्हें सामान्य
अध्यापक पढ़ाने से छोड़ देता है। उन्होंने कहा कि उनकी विशेष डिग्री
डिप्लोमा दो साल की होती है जोकि जेबीटी के बराबर है। सरकार द्वारा बनाए गए
आरएंडपी नियमों नियमों को पूरा करते हैं और टेट भी पास हैं। इसके बावजूद
भी सरकार ने न तो इनके लिए कोई नीति बनाई, न ही मानदेय बढ़ाया गया।
उन्होंने मांग की है कि सर्व शिक्षा अभियान से हटाकर शिक्षा विभाग में
विशेष नीति के तहत रखा जाए और विशेष शिक्षकों की भर्ती की जाए।