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शिक्षकों की अलग से होगी जेसीसी

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
शिक्षकों की मांगों को एक मंच से आवाज देने के लिए अब प्रदेश में पहली बार जल्द ही टीचर्स की जेसीसी करवाई जाएगी। सचिवालय में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा के साथ मंगलवार को राजकीय अध्यापक संघ की एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में संघ द्वारा कुल 48 मांगों पर चर्चा की गई। इसमें चालिस पर सहमति भी बनी। बैठक में इन मानी गई मांगों को तीस जून तक पूरा करने का आश्वासन प्रदेश सरकार ने राजकीय अध्यापक संघ को दिया।

सरकार ने जिसमें मुख्य मांगों में शिक्षकोंं की जल्द जेसीसी करवाने पर सहमति बनी। शिक्षकों के लिए गेस्ट हाउस, टीजीटी का प्रवक्ता पदनाम बहाल करना, एलीमेंट्री एजुकेशन को लागू करना, स्कूलों में डाटा ऑपरेटर के पदों को बहाल करना संबंधित मुद्दों पर सहमति बनी। राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष विरेंद्र चौहान ने कहा कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्त आयु 62 वर्ष करने और पुरानी पेंशन को बहाल करने के मामले पर भी शिक्षा मंत्री ने गौर किया है। इसमें दोनों मुख्य मांगों को प्रपोज़ल के माध्यम से प्रदेश सरकार को सौंपने के लिए कहा है।

शास्त्री व भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम बहाल करने पर सरकार ने हामी भरी

जिन अन्य मांगों को फाइनांस में भेजने के लिए कहा गया उसमें नई ग्रेड-पे देना, अगले वेतन आयोग के लाभ जारी करना, सभी भत्तों को पंजाब व केंद्र सरकार के समान जारी करना शामिल किया गया है। उच्च शिक्षा व प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की नियुक्ति हेतु दस वर्ष स्कूली शिक्षण अनुभव रखने की मांग शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाई गई थी, जिस पर भी विचार करने के बारे में सचिव ने कहा। वहीं, शास्त्री व भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम बहाल करने पर सरकार ने हामी भरी।
संघ के अध्यक्ष ने कहा कि अध्यापकों को उनकी अनुबंध पर नियुक्त की तिथि से वरिष्ठता लाभ सहित सभी वित्तीय लाभ देने। एक ही पद पर 15 वर्ष की नियमित सेवा उपरांत दो विशेष वेतन वृद्धियां देने की मांग को मामने पर भी सरकार ने विचार करने के लिए कहा। पीजीटी आईपी पदों पर पदोन्नति के लिए पांच वर्ष कंप्यूटर शिक्षण अनुभव की शर्त खत्म की जाने की मांग को भी जल्द मानने के लिए कहा है।

ट्रांसफर एक्ट का मुद्दा भी उठा

बैठक में शिक्षकों की ट्रांसफर एक्ट का मुद्दा भी उठा। संघ ने कहा कि शिक्षक ट्रांसफर एक्ट की जगह हिमाचल ट्रांसफर एक्ट बनाया जाए। बैठक में शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में संस्कृत तथा अंग्रेजी भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नैतिक शिक्षा को भी पाठयक्रम में शामिल करने पर विचार कर रही है। इस पर जल्द प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

नहीं पहुंच पाए दोनों निदेशक

शिक्षा विभाग की इस अहम बैठक में दोनों निदेशक नहीं पहुंच पाए। राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष विरेंद्र चौहान ने कहा कि हैरानी है कि इस बैठक में न तो उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक आ पहुंच पाए और न ही प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक मीटिंग में आ पाए। अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा मंत्री के बुलावे पर भी दोनों निदेशक नहीं आए और उनकी जगह विभाग ने संयुक्त निदेशक आए।

इन मांगों पर खूब हुई खींचतान

बैठक में कुछ ऐसी मांगें ऐसी भी थी, जिन पर संघ और सरकार के बीच काफी खींचतान हुई। इसमें पैट, पैरा, पीटीए को पक्की नियुक्ति देने के मामले में सरकार ने लीगल ऑपिनियन लेने के लिए कहा। संघ ने सुप्रीम कोर्ट में केस क्लीयर होने की बात कहते हुए दबाव डाला कि अब यह केस सरकार के हाथ में है, लेकिन सरकार शिक्षकों को पक्की नियुक्ति देने में हिचकिचा रही है। वहीं बैठक में कंप्यूटर शिक्षकों का मुद्दा भी गरमाया।

सिर्फ ट्रांसफर के लिए ही आते हैं शिक्षक

शिक्षा की गुणवत्ता पर भी संगठन बात करें
शिक्षा मंत्री ने शिक्षक संघों के ऊपर तंज कसते हुुए कहा कि अभी तक जो भी शिक्षक और शिक्षक संघ उनके पास आते हैं वे ट्रांसफर करवाने के लिए ही आते हैं। वहीं, सुबह से शाम तक इसी के लिए उनके यहां फोन आते हैं। शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए कोई भी नहीं आता है। इसके चलते वह काम पर ध्यान नहीं दे पाते। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे प्रदेश में शिक्षा का स्तर बनाए रखें। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष स्थान बनाया है।

शिखर पर पहुंचकर उस स्थान को बनाए रखने के लिए और अधिक कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की विभाग से संबंधित मांगों पर 30 जून तक निपटारा कर दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने की शिक्षक समुदाय से संबंंधित मांगों के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने के लिए दिए सुझाव की सराहना की।

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