हिमाचल दस्तक : राजेश मंढोत्रा: शिमला : राज्य सरकार स्कूलों में खाली पदों को भरने के लिए अस्थायी तौर पर रिटायर्ड टीचर्स की सेवाएं ले सकती हैं। हाईकोर्ट में चल रहे केस के बाद बढ़े दबाव के बाद शिक्षा सचिव ने सरकार को रिक्तियां भरने के लिए 4 विकल्प दिए हैं।
इसमें से रिटायर शिक्षकों की सेवाएं लेना भी एक है। अन्य तीन विकल्पों में हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग से बाहर सीधी और बैचवाइज भर्ती, पीरियड बेस पर टीचर्स की नियुक्ति और एसएमसी योजना को संशोधित कर इससे टीचर नियुक्त करना शामिल है। एसएमसी के वर्तमान फार्मूले को सुप्रीमकोर्ट ने रोक दिया है और इसे लागू करना कोर्ट की अवमानना के दायरे में आएगा। इसमें एक पात्रता रखने वाले सभी उम्मीदवारों को प्रतियोगिता का मौका नहीं मिलता।
13 जून को हुई कैबिनेट की बैठक के लिए भी यह एजेंडा आखिर में बन गया था, लेकिन सरकार ने सुझाव दिया था कि इस पर कैबिनेट से पहले ही चर्चा कर ली जाए। इसलिए यह लगा नहीं। इसके अगले दिन शुक्रवार को हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा को ही कोर्ट में तलब कर लिया। अब सरकार के लिए दुविधा इस बात की है कि यदि हमीरपुर चयन आयोग से भर्ती करते हैं तो प्रक्रिया पूरा होने में एक साल लग जाएगा। इसलिए अन्य विकल्पों पर अब कैबिनेट की अगली बैठक में फैसला होगा।
करीब 10 हजार शिक्षकों के पद खाली
वर्तमान में करीब 10 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार प्राइमरी स्कूलों में 1754, अपर प्राइमरी मे 2499 और सीएंडवी अध्यापकों के 5277 पद रिक्त हैं। शिक्षकों की तनख्वाह देने को जारी बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा लैप्स हो रहा है।
बुधवार को सुनवाई होगी अब केस की
हाईकोर्ट में इस केस की सुनवाई अब बुधवार को होगी। शुक्रवार को तय सुनवाई में हाईकोर्ट ने निजी तौर पर शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा को बुलाया था। अरुण शर्मा किसी अन्य कोर्ट केस में अधीनस्थ न्यायालय में थे, इसलिए हाईकोर्ट ने उन्हें अगली तिथि को आने को
कहा था।