टीजीटी, मेडिकल, नॉन मेडिकल और आर्ट्स के अध्यापकों का टोटा
स्कूलों में अध्यापकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
विनीत कुमार
सोलन। सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार स्कूलों में अध्यापकों के पदों को भरने की घोषणा तो करती है, लेकिन उन्हें जमीनी तौर पर लागू नहीं किया जा रहा है। आलम यह है कि जिला के प्रारंभिक स्कूलों में 500 से अधिक अध्यापकों के पद खाली पड़े हुए हैं।
प्राथमिक स्कूलों में कई जगहों पर स्कूल में एक एक अध्यापक ही सेवाएं दे रहा है। अध्यापकों की कमी के चलते स्कूलों में अपना भविष्य बनाने आने वाले बच्चों को दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। अब शिक्षा विभाग की ओर से सितंबर माह में ली जाने वाली टेट की परीक्षा के बाद ही इन स्कूलों में अध्यापकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के तहत आने वाले स्कूलों में पिछले कई सालों से अध्यापकों के पद खाली पड़े हुए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में अध्यापकों के पद भरने के लिए सितंबर माह में टेट की परीक्षा रखी गई है। इसका परिणाम आने के बाद ही स्कूलों में अध्यापकों की भर्ती हो सकती है। गौर रहे कि जिला के प्राथमिक स्कूलों में वर्तमान में टीजीटी, आर्ट्स, नॉन मेडिकल, मेडिकल और जेबीटी के 548 पद खाली पड़े हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा पद टीजीटी और जेबीटी रिक्त हैं। जिला सोलन में प्राथमिक स्कूलों की संख्या 769 है।
स्कूलों में इतने पद हैं खाली
शिक्षा विभाग की ओर से सितंबर माह में टेट की परीक्षा को आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा के होने के बाद ही स्कूलों में विभाग की ओर से अध्यापकों के पद भरे जा सकेंगे। बताया जा रहा है कि नवंबर दिसंबर माह तक इस परीक्षा का परिणाम आएगा। अब तक खाली पदों में टीजीटी के 199, आर्टस के 145, नॉन के मेडिकल 31, मेडिकल के 23 व जेबीटी के 150 शामिल हैं।
टेट के बाद साफ होगी स्थिति
प्रारंभिक उपनिदेशक चंद्रेश्वर शर्मा ने बताया कि अभी तक अध्यापकों की भर्ती नहीं हो पाई है। सितंबर माह में टेट की परीक्षा आयोजित होनी है। परीक्षा के बाद ही स्कूूलों में अध्यापकों के पदों को विभाग द्वारा भरा जाएगा।