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एसएमसी भर्ती के खिलाफ प्रदेश प्रशिक्षित कला अध्यापक बेरोजगार संघ मुखर

सरकाघाट— प्रदेश सरकार यदि स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद भरना चाहती है तो बैचवाइज व कमीशन के आधार पर भर्ती की जाए। एसएमसी से शिक्षकों की भर्ती करना प्रशिक्षित युवाओं से सरासर धोखा है। प्रदेश में एसएमसी भर्तियों को लेकर हिमाचल प्रदेश प्रशिक्षित कला अध्यापक बेरोजगार संघ की राज्य स्तरीय बैठक प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में सरकाघाट में हुई।
इसमें प्रदेश भर से 90 पदाधिकारियों ने हाजिरी भरी। प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एसएमसी भर्तियों की अनुमति देकर जहां हजारों बेरोजगार प्रशिक्षित अध्यापकों के साथ धोखा किया है, वहीं सभी नियमों को भी दरकिनार किया है। इससे इस वर्ग के बेरोजगार आहत हैं, जिसे वे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था को ताक पर रखकर भर्तियां होती रहीं तो प्रदेश में नौकरी की आस में बैठे हजारों बेरोजगार बिना नौकरी के ही रिटायर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि सत्ता में आते ही वर्तमान सरकार द्वारा नियमित भर्तियां करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एसएमसी भर्ती पर रोक लगाने का वादा भी किया गया था, लेकिन सरकार अपने निर्णय को लेकर स्थिर नहीं रह पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश में एसएमसी भर्तियों को लेकर सभी वर्गों से संबंधित संगठनों के विरोध के चलते पिछली कैबिनेट में यह निर्णय लिया गया कि प्रदेश में एसएमसी से भर्तियां नहीं की जाएंगी, लेकिन सरकार दोबारा अपने निर्णय को बदलकर एसएमसी भर्तियों की बात दोहराकर हजारों बेरोजगारों की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश में जनजातीय व दुर्गम क्षेत्रों की दुहाई देकर पीटीए, पैरा और पैट की तरहे चहेतों को पिछले दरवाजे से शामिल करने की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां तक प्रदेश में दुर्गम जनजातियों क्षेत्रों में पद भरने की बात है तो प्रदेश में पीटीए, पैरा, पैट के बाद एसएमसी की तरह बाहरी भर्तियों की मार झेल रहे हजारों बेरोजगार एफिडेविट देकर प्रदेश के किसी भी कोने में नौकरी करने के लिए तैयार हैं, जबकि सरकार नियमों को दरकिनार कर और भर्तियां करने को अड़ी है। संघ ने शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि एसएमसी भर्ती पर रोक लगाई जाए और बैचवाइज व कमीशन के आधार पर नियुक्तियां की जाएं अन्यथा 2019 के चुनावों में खामियाजा भुगतने को तैयार रहें।

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