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मोदी से तारीफ पाकर लौटे शिक्षक की 'खुली पोल', बताए गए उसके ये झूठ
शिमला। अभी दो दिन पहले हिमाचल प्रदेश के एकमात्र
शिक्षक को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान
से उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सम्मानित किया। जिससे जश्न के महौल में
खलल पड़ गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि जिन मापदंडो के आधार पर जेबीटी
शिक्षक सुनील धीमान को राष्ट्रीय सम्मान दिया गया,उन्हें पूरा किये बिना ही
झूठ के सहारे सम्मान हासिल कर लिया।
दरअसल, सुनील
धीमान जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी के पास बंडोल प्राथमिक स्कूल में बतौर
जेबीटी शिक्षक तैनात हैं। उन्होंने दावा किया था कि वह झुगी झोंपड़ी में रह
रहे प्रवासी मजदूरों को पढ़ाते हैं। लेकिन जब स्कूल परिसर का दौरा किया
गया,तों बंडोल स्कूल का कुछ ओर ही नजारा सामने आया। यहां एक भी बच्चा
प्रवासी मजदूरों का शिक्षा हासिल करने के लिये दाखिल नहीं हुआ है। बंडोल और
हिरण गांवों के करीब 64 बच्चे यहां शिक्षा हासिल कर रहे हैं। हैरानी की
बात थी कि जिस चौथी व पांचवी कक्षा के छात्रों को पढ़ाने का दावा सुनील
धीमान कर रहे हैं। बंडोल स्कूल में शिक्षा हासिल कर रहे यह बच्चे सामान्य
ज्ञान में फिसड्डी हैं। इसी स्कूल में कार्यरत दूसरे शिक्षक सुनील धीमान के
इस चयन को दबी जुबान में आलोचना करते नजर आये।
उन्होंने
कहा कि स्कूल प्रबंधन और गांववासियों के पूरे सहयोग से ही स्कूल में सुधार
हुआ है। इसमें अकेले सुनील धीमान क्रेडिट नहीं ले सकते। स्कूल में हर्बल
गार्डन से लेकर दूसरे सुधार सामूहिक तौर पर ही किये गये। हैरानी की बात है
कि सम्मान लेने वाले शिक्षक की क्लास के बच्चे ढ़ंग से अंग्रेजी में अपना
नाम भी नहीं बोल पा रहे हैं। बच्चों के लिये आज भी प्रदेश के मुख्यमंत्री
वीरभद्र सिंह ही हैं। विवाद बढ़ता देख अब शिक्षा के अधिकारी इस मामले की
जांच करवाने जा रहे हैं। ताकि तथ्यों का पता चल सके। एक अधिकारी ने माना कि
शिक्षक के दावे गलत पाये गये उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।