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विवि में डेढ़ साल से लटकी शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ

प्रदेश विश्वविद्यालय में करीब डेढ़ साल से लंबित शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण रोस्टर लागू करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही करार देते हुए विभागवार रोस्टर लागू करने का फैसला सुनाया है।

इस फैसले के बाद एचपीयू करीब ढाई सौ शिक्षकों के रिक्त पद भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा। प्रदेश विवि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण विवि की सर्वोच्च संस्था कार्यकारी परिषद से भर्ती की मंजूरी मिलने के बावजूद रिक्त पदों को विज्ञापित तक नहीं कर पा रहा था।

कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने पदभार संभालते ही रिक्त पदों को प्राथमिकता पर भरने की बात कही थी। विवि में शिक्षकों की करीब डेढ़ साल से भर्ती की प्रक्रिया लटकी थी, जिससे अधिकतर विभागों में गेस्ट फैकल्टी और सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रति लेक्चर आधार पर यूजीसी के तय नियमों के तहत तैनात कर किसी तरह से शिक्षण कार्य चलाया जा रहा है।

कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया : पीआरओ 
विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी डॉ. रणवीर वर्मा ने माना कि आरक्षण रोस्टर को लेकर दिए गए फैसले का अध्ययन करने के बाद भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने के मामले को विवि की सर्वोच्च व निर्णायक संस्था कार्यकारी परिषद में मंजूरी के लिए लेकर जाएगा। उसके बाद भर्ती की आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होेंने माना कि मामला कोर्ट के विचाराधीन होने और फैसला न आने के कारण शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को रोका गया था।

यह था मामला 
मानव संसाधन विकास मंत्रालय यूजीसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के शिक्षक भर्ती में विभाग को एक यूनिट मानकर रोस्टर विभागावार लागू कर भर्ती करने के फैसले को लेकर याचिका दायर की थी। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही करार दे विभाग वार शिक्षक भर्ती में तय आरक्षण कोटा लागू करने का फैसला दिया है। यूजीसी की शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में पूरे विश्वविद्यालय को एक यूनिट मान कर 13 प्वाइंट रोस्टर को लागू करने का पक्षधर था।

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