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राज्य में शिक्षकों के तबादले के लिए नीति , हैल्थ सोसायटियों में सेवारत 1334 कर्मचारियों के नियमित करने की कोई पालिसी नहीं

शिमला. राज्य में शिक्षकों के तबादले के लिए सरकार कोई नीति बना रही है। विधायक जगत सिंह नेगी के सवाल के लिखित जवाब में सरकार की आेर से ये जानकारी मुहैया करवाई गई। राज्य सरकार शिक्षकों के तबादले 2013 में बनी तबादला नीति के मुताबिक ही कर रही है।
राज्य में लंबे समय से शिक्षकों से लेकर आम कर्मचारियों के तबादलों को लेकर एक्ट लाने की बात कहीं जा रही है। पहले शिक्षा विभाग ने इसके लिए पहल भी की थी, कैबिनेट में भी इस पर चर्चा की गई, लेकिन भाजपा सरकार के एक साल के शासनकाल में अभी तक इसे कैबिनेट की मंंजूरी देकर सरकार लागू नहीं करवा पाई है।

जयराम सरकार ने सत्ता में आने के बाद से लगातार ही तबादला एक्ट लाने की बात कहीं। शिक्षा विभाग ने हरियाणा से लेकर देश के अन्य राज्यों के तबादला एक्ट लाकर इसे स्टडी भी किया, लेकिन शिक्षकों के तबादलों को सख्ती से लागू करने के लिए फैसला अभी तक नहीं हो सका है। हिमाचल में 70 हजार से ज्यादा शिक्षक है। इसमें प्रिंसिपल से लेकर जेबीटी शिक्षक तक शामिल है। इन शिक्षकों में हर शिक्षक वर्ग की संख्या पंद्रह हजार से ज्यादा है। पहली बार नहीं बल्कि हर सरकार पहले तबादला नीति बनाती है, दूसरा रिजल्ट पालिसी तैयार करने का काम करती है। पिछले एक दशक से कोई भी राज्य सरकार शिक्षकों के लिए तबादला पालिसी तो दूर, खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने की पालिसी को भी लागू नहीं कर सकी है। अभी तक राज्य में शिक्षकों के तबादले 2013 में बने नियमों के मुताबिक ही हो रहा है। वर्तमान सरकार ने इतना बदलाव जरूर किया है कि राज्य में शिक्षकों के तबादले फिलहाल सेशन के बीच में नहीं किए जा रहे हैं।

हैल्थ सोसायटियों में सेवारत 1334 कर्मचारियों के नियमित करने की कोई पालिसी नहीं

राज्य में हैल्थ सैक्टर में विभिन्न सोसायटियों में सेवारत कर्मचारियों की 1334 है। विधायक विनय कुमार के सवाल के लिखित जवाब में सरकार की आेर से बताया कि राज्य में विभिन्न हैल्थ सोसायटियों के तहत 1334 कर्मचारी अनुबंध पर सेवाएं दे रहे हैं। इसमें 1061 कर्मचारी एनएचएम में, 173 एड्स कंट्रोल सोसायटी में, 6 ईएसआई आैर 94आरकेएस सोसायटी में सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 779 कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्होंने तीन साल के ज्यादा समय से सेवाएं लगातार दी है। इसके बावजूद इन्हें नियमित करने की कोई नीति नहीं हैं। इसमें सरकार ने तर्क दिया है कि ये कर्मचारी सोयासटी के कर्मचारी है, इसलिए इनके लिए सरकार में कोई नीति नहीं हैं।

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