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हिमाचल शिक्षक महासंघ: कंप्यूटर और एसएमसी शिक्षकों के लिए बनाई जाए स्थायी नीति

 अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सचिव पवन मिश्रा और हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने कंप्यूटर और एसएमसी शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की है। मंगलवार को

राजधानी शिमला में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए इन पदाधिकारियों ने समान काम के लिए समान वेतन देने की वकालत की। पवन मिश्रा ने हिमाचल प्रदेश सरकार को नए वेतनमान की अधिसूचना जारी करने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खराब वित्तीय स्थिति के बावजूद हिमाचल प्रदेश सरकार ने कोरोना संकट के बाद की स्थितियों को संभाल के रखा और अपने कर्मचारियों को उनके हक दिए। 


उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से अधिक समय से कंप्यूटर शिक्षकों ने अपनी सेवाएं बहुत ही कम वेतन और खराब आर्थिक स्थिति में कंपनी के माध्यम से दी हैं। प्रदेश में एसएमसी पर तैनात शिक्षक भी अपने लिए स्थाई नीति की उम्मीद में बैठे हैं। कई वर्षों से विद्यालयों में वोकेशनल अध्यापकों को भी कम वेतन में काम करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय सचिव ने हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की ओर से उठाए गए अन्य 12 मसलों का भी जिक्र किया जो हाई पावर कमेटी को भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त स्नातक अध्यापकों को पदोन्नति में मुख्य अध्यापक और प्रधानाचार्य बनने की दोनों ऑप्शन दी जाएं।


भाषा अध्यापकों को टीजीटी का दर्जा दिया जाए। प्रवक्ता पदनाम पर किसी प्रकार की विसंगति नहीं होनी चाहिए। इसके लिए 1986 के आरएंडपी नियमों को बहाल किया जाए। स्नातक अध्यापकों को उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन किया जाए। 2004 से पूर्व की पेंशन योजना बहाल की जाए। प्रधानाचार्य की पदोन्नति नियमित आधार पर हो। इस अवसर पर महासंघ के प्रांत संगठन मंत्री विनोद सूद, कोषाध्यक्ष डॉ. यशवंत शर्मा, सह संगठन मंत्री भीष्म सिंह सहित विभिन्न पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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