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प्रदेश गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ ने लिपिक वर्ग के वेतन विसंगतियों पर व्यक्त किया रोष

 नूरपुर, संवाद सहयोगी। गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ ने छठे वेतन आयोग की अधिसूचना के आधार पर लिपिक वर्ग के वेतन में हुई वेतन विसंगति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष संदीप पठानिया ने कहा कि पूर्व में 2009 और 2012 के स्केल में भी लिपिक वर्ग के साथ भेदभाव किया गया और वर्ष 2006 से 2011 तक लिपिकों को कम ग्रेड-पे और कम पे-बैंड में शोषण किया गया था और जब यह गलती तत्कालीन सरकार ने सुधारी तो उन स्केलों को छोड़ने के लिए 2.59 को गुणाक दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उक्त सही वेतन के लाभ लेने पर 2.25 का गुणाक दिया जा रहा है जो कि लिपिक वर्ग के साथ बहुत बड़ा धोखा है। संदीप पठानिया ने कहा कि पंजाब में इस धोखे से बचाव हेतु कर्मचारी आंदोलनों से सबक लेते हुए 15 प्रतिशत वेतन का विकल्प दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक प्रदेश में लिपिक वर्ग को अलग-अलग दो वेतन प्रदान किए जा रहे हैं। अब नए वेतन आयोग की अधिसूचना में फिर से हिमाचल प्रदेश के लिपिक वर्ग को पंजाब की तर्ज पर स्केल नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व वित विभाग को पंजाब वेतन आयोग या पंजाब सरकार के वेतन के आधार पर ही लिपिक वर्ग के स्केल हिमाचल में निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जो अधिसूचना प्रदेश वित विभाग द्वारा जारी की गई है उसके आधार पर हिमाचल और पंजाब के लिपिक वर्ग के वेतनमान में सात हजार रुपये से ज्यादा का बेसिक वेतन में अंतर आ रहा है जो कि लिपिक वर्ग के साथ घोर अन्याय है।

गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ ने मांग की है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा निर्धारित वेतनमान के अनुसार ही हिमाचल प्रदेश में भी लिपिक वर्ग को वेतनमान प्रदान किया जाए। पठानिया ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री, व शिक्षा मंत्री , शिक्षा विभाग के अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा तथा एक सप्ताह के अंदर वेतन विसंगति को दूर किया जाए तब तक कोई भी लिपिक वर्ग नए वेतनमान के लिए अपने आप्शन विभाग को प्रदान नहीं करेंगे। इस बारे सभी ब्लाकों के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों ने गैर शिक्षक महासंघ का समर्थन किया।

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