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अब हफ्ते में दो दिन ‘वर्दी’ पहनेंगे टीचर, जामली स्कूल में शिक्षकों ने अपनाया ड्रेस कोड, प्रधानाचार्य के प्रयासों की सराहना

 सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले नौनिहालों के लिए तो सरकार, शिक्षा विभाग ने ड्रेस कोड निर्धारित किया है, लेकिन अभी तक हिमाचल में ऐसा कोई भी स्कूल नहीं था, जहां पर शिक्षकों के लिए डे्रस कोड लागू किया गया है।

जिला बिलासपुर के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जामली ऐसा स्कूल बना है, जहां पर अब शिक्षक भी स्कूली नौनिहालों की तर्ज पर अपनी ड्यूटी के दौरान डे्रस कोड में नजर आएंगे। स्कूल प्रशासन की ओर से लिए गए इस निर्णय की खूब सराहना हो रही है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जामली के स्कूल प्रधानाचार्य राकेश मनकोटिया की ओर से सभी शिक्षकों के साथ ही स्कूल प्रबंधन समिति की सहमति से स्कूल में ड्रेस कोड लागू किया गया है। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन की ओर से निर्णय लिया गया है कि शिक्षक स्कूल में विशेष कार्यक्रम पर या फिर सोमवार या गुरुवार को ड्रेस कोड में स्कूल आएंगे, ताकि शिक्षकों की पहचान अलग से हो सके।

वहीं, स्कूल आने वाले अभिभावक भी स्कूल में स्कूली शिक्षकों की पहचान आसानी से कर सकें। उल्लेखनीय है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए कोई भी ड्रेस कोड नहीं है, लेकिन जामली स्कूल में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड का निर्णय लिया गया है। अभी तक सप्ताह में दो दिन ही ये शिक्षक ड्रेस कोड में नजर आएंगे। बहरहाल, स्कूल प्रशासन की ओर से लिए गए निर्णय की सराहना हो रही है। इस बारे में जामली स्कूल के शिक्षक सुनील चौहान का कहना है कि स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में शिक्षकों के लिए दो दिनों के लिए डे्रस कोड का निर्णय लिया गया था। निर्णय के तहत स्कूल में शिक्षक अब निर्धारित दिनों में ड्रेस कोड में आएंगे। (एचडीएम)

ऐसे बनी बात

स्कूल प्रधानाचार्य राकेश मनकोटिया इससे पहले स्कूल मुखिया के तौर धारटटोह स्कूल में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वहां पर इन्होंने स्कूल में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड के लिए प्रयास किए थे, लेकिन तब तक उनका तबादला जामली स्कूल के लिए हो गया। यहां पर भी उन्होंने इस ड्रेस कोड के मैथ्ड को अपनाने के लिए प्रयास किए। अब उनके प्रयास सफल हुए हैं। स्कूल प्रधानाचार्य की मानें, तो हर साल शिक्षक अपने लिए कपड़ों की खरीददारी तो करते ही हैं, लेकिन एक साल में एक जैसे ही ड्रेस कोड की भी खरीददारी की जा सकती है, जिसके चलते अब इनके प्रयास सराहनीय रहे हैं और स्कूल ने प्रदेश भर में नाम कमाया है।

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