; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Advertisement

अस्थाई कर्मियों को शीघ्र अनुबंध पॉलिसी में करंे शामिल : अनिल

प्रदेश सरकार राज्य और केंद्र सरकार की स्कीमों के तहत अस्थाई कर्मचारियों को तैनात कर उनके अपने कर्मचारियों की तरह काम ले रही है, मगर अस्थाई कर्मचारियों को अपना कर्मचारी मनाने को तैयार नहीं है। सरकार का यह रवैया उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहा है।
जिसे अब चुप बैठकर सहन नहीं किया जाएगा। 26 मई तक उनकी मांग को नहीं माना तो वे संघर्ष की राह पर उतरने से गुरेज नहीं करेंगे। कम्प्यूटर डाउन और पैन डाउन जारी रहेगा।

यह बात बीडीओ ऑफिस के पंचायत समिति हाल में हुई हिमाचल ज्वाइंट एक्शन कमेटी की प्रदेश स्तरीय बैठक में प्रदेशाध्यक्ष अनिल सिपहिया और महासचिव दिलेर सिंह सैनी ने कही। उन्होंने कहा कि इन अस्थाई कर्मचारियों से विभिन्न विभागों में बतौर कम्प्यूटर शिक्षक, ग्राम रोजगार सेवक और स्वच्छ भारत मिशन कर्मचारी अपनी सेवाएं पिछले आठ-आठ साल से रेग्युलर कर्मचारियों की तरह दे रहे हैं, मगर वेतन की बारी आती है, तो उन्हें प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के वर्कर बताकर अपना पल्ला झाड़ लेती है।

स्थाईनीति, स्थाई वेतन चाहिए : बैठकमें सभी ने एक सुर में आवाज उठाई कि इस समय करीब डेढ़ हजार के करीब अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई नीति और स्थाई वेतन चाहिए। प्रदेश सरकार पॉलिसी स्वयं बनाए या फिर केंद्र सरकार से बनवाए, उनको तो हक मिलने से मतलब है। क्योंकि केंद्र सरकार अपनी स्कीमों में पैसा देने से मतलब रखती है। प्रदेश सरकार ही इन स्कीमों को प्रदेश में चलाने के लिए कर्मचारी रखती और कार्य करवाती है। असल में काम भी प्रदेश में हो रहा, अस्थाई कर्मचारी भी प्रदेश के तैनात होते हैं। इन्हें अपना समझना तर्कसंगत बात नहीं है।

ये रहे मौजूद

इसमौके पर अनिल सिपहिया, महासचिव दिलेर सिंह सैनी, प्रेस सचिव यशवंत ठाकुर, शिव राज, जिला प्रधान नरेश कुमार, प्रवीण राणा, मोहिंद्र नंटा, निकिता, राजेंद्र कौर, जगवीर सिंह, भाेरंज से प्रवीण कुमार, नादौन से संजीव शर्मा, रविंद्र कुमार, सागर, अनिल, नितिन, वीरवल, घुमारवीं से राजेंद्र कुमार सहित कई कर्मचारी मौजूद थे।

आरकेएस की तरह हो रेग्युलर

उनकाकहना है कि हॉल ही प्रदेश सरकार ने अस्पतालों में तैनात रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों काे अपना कर्मचारी मानकर रेग्युलर कर दिया। वे भी 2008 से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश में पार्ट टाइम वर्करों को भी 8 साल बाद डेलीवेज और अनुबंध पॉलिसी में शामिल कर लिया जा रहा है, मगर उनके लिए कोई हामी नहीं भर रहा है। पहले उनसे कमीशन पर काम लिया जाता अब हर माह करीब 5 हजार मानदेय दिया जा रहा, जिससे वे परिवार को पालन पोषण नहीं कर पा रहे हैं।

हमीरपुर : बीडीओ ऑफिस के बाहर हिमाचल ज्वांइट एक्शन कमेटी के सदस्य मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC

UPTET news