राज्य ब्यूरो, शिमला : हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली को
एक उम्मीदवार ने आरटीआइ के तहत सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक क यूनिकेशन इजीनियरिग में असिस्टेट प्रोफेसर के लिए उम्मीदवार
कमल सिंह ने कहा कि अनोखी प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है।
आरटीआइ से मिली जानकारी के मुताबिक तकनीकी शिक्षा विभाग में असिस्टेट प्रोफेसर की इस नियुक्ति के लिए एसटी कोटे से एक ही सीट थी। आयोग ने जिस अभ्यर्थी को साक्षात्कार में टॉपर बनाया, वह टेस्ट में कायदे से फेल है यानी 100 नंबर के टेस्ट में पास होने के लिए कम से कम 33 या 35 नंबर चाहिए होते है। वहीं, उस अभ्यर्थी के 27 अंक ही थे और उसे साक्षात्कार में सबसे अधिक 55 नंबर दिए गए। आयोग के माध्यम से जिनती नियुक्तिया होती हैं, उसमें साक्षात्कार में टॉपर को ही मान्यता दी जाती है। यहा स्क्रीनिंग टेस्ट सिर्फ औपचारिकताएं ही है। आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार स्क्रीनिंग टेस्ट में कमल सिंह एसटी कोटे से सबसे अधिक 47 अंकों के साथ टॉप पर रहे लेकिन साक्षात्कार में 48 नंबर दिए गए। टेस्ट के टॉपर कमल सिंह का आरोप है कि टेस्ट में फेल अभ्यर्थी को साक्षात्कार में बैठने की अनुमति किस आधार पर दी और उसे ही असिस्टेट प्रोफेसर का तोहफा दिया गया। कमल सिंह का आरोप है कि एसटी की एक सीट के लिए जिन पाच अभ्यर्थियों ने टेस्ट दिए, उन सभी को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। हालाकि एक सीट के लिए तीन अभ्यर्थियों को बुलाया जाता है। हैरानी की बात है कि लोक सेवा आयोग ने रिकार्ड बनाते हुए एक पद के लिए पाच उमीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया।
स्क्रीनिंग टेस्ट में नहीं होते पास या फेल
एक सीट के लिए तीन उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाते है। स्क्रीनिंग टेस्ट में पास या फेल नहीं होते हैं। अभ्यर्थी केवल स्क्रीन किए जाते हैं। कट ऑफ लिस्ट के लिए कोई निर्धारित अंक नहीं रखते। यहा पर साक्षात्कार में टॉपर को ही प्राथमिकता होती है।
-संजीव पठानिया, सचिव, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
आरटीआइ से मिली जानकारी के मुताबिक तकनीकी शिक्षा विभाग में असिस्टेट प्रोफेसर की इस नियुक्ति के लिए एसटी कोटे से एक ही सीट थी। आयोग ने जिस अभ्यर्थी को साक्षात्कार में टॉपर बनाया, वह टेस्ट में कायदे से फेल है यानी 100 नंबर के टेस्ट में पास होने के लिए कम से कम 33 या 35 नंबर चाहिए होते है। वहीं, उस अभ्यर्थी के 27 अंक ही थे और उसे साक्षात्कार में सबसे अधिक 55 नंबर दिए गए। आयोग के माध्यम से जिनती नियुक्तिया होती हैं, उसमें साक्षात्कार में टॉपर को ही मान्यता दी जाती है। यहा स्क्रीनिंग टेस्ट सिर्फ औपचारिकताएं ही है। आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार स्क्रीनिंग टेस्ट में कमल सिंह एसटी कोटे से सबसे अधिक 47 अंकों के साथ टॉप पर रहे लेकिन साक्षात्कार में 48 नंबर दिए गए। टेस्ट के टॉपर कमल सिंह का आरोप है कि टेस्ट में फेल अभ्यर्थी को साक्षात्कार में बैठने की अनुमति किस आधार पर दी और उसे ही असिस्टेट प्रोफेसर का तोहफा दिया गया। कमल सिंह का आरोप है कि एसटी की एक सीट के लिए जिन पाच अभ्यर्थियों ने टेस्ट दिए, उन सभी को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। हालाकि एक सीट के लिए तीन अभ्यर्थियों को बुलाया जाता है। हैरानी की बात है कि लोक सेवा आयोग ने रिकार्ड बनाते हुए एक पद के लिए पाच उमीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया।
स्क्रीनिंग टेस्ट में नहीं होते पास या फेल
एक सीट के लिए तीन उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाते है। स्क्रीनिंग टेस्ट में पास या फेल नहीं होते हैं। अभ्यर्थी केवल स्क्रीन किए जाते हैं। कट ऑफ लिस्ट के लिए कोई निर्धारित अंक नहीं रखते। यहा पर साक्षात्कार में टॉपर को ही प्राथमिकता होती है।
-संजीव पठानिया, सचिव, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC