; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Advertisement

वेतन कटौती पर भड़के शिक्षक, अब कोर्ट जाने की तैयारी

ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला प्रदेश के हजारों शिक्षकों के वेतन में कटौती के आदेश से शिक्षक संगठन भड़क गए हैं। शिक्षा विभाग के खिलाफ संगठन हाईकोर्ट में जाने की तैयारी में हैं। चार शिक्षक संगठनों प्रदेश शिक्षक महासंघ, प्रदेश स्नातकोत्तर अध्यापक संघ, प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ और हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने टीजीटी, पीजीटी को लेकर शिक्षा विभाग पर तुगलकी आदेश जारी करने का आरोप लगाया है।

इनका कहना है कि नियमित होने पर तनख्वाह बढ़ाना तो दूर शिक्षकों के वेतन में कटौती कर शोषण किया जा रहा है। संगठन पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। प्रदेश शिक्षक महासंघ ने शिक्षा विभाग की वेतन कटौती और रिकवरी की अधिसूचना का विरोध किया है।

प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. मामराज पुंडीर, प्रांत संगठन मंत्री पवन मिश्रा, अतिरिक्त महामंत्री विनोद सूद, प्रांत महामंत्री जगवीर चंदेल, प्रांत उपाध्यक्ष जय शंकर ठाकुर, प्रांत कोषाध्यक्ष तीर्थ नंद, मीडिया प्रभारी अशोक शर्मा ने कहा कि मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

कहा कि जो अध्यापक 2014-15 में नियमित हुए थे, उन्होंने इसके लिए 12 साल तक इंतजार किया। विभाग ने इन्हें 14430 रुपये के न्यूनतम पे बैंड पर फिक्स किया, अब रिकवरी के आदेश दिए जा रहे हैं। ऐसे तुगलकी आदेशों पर तुरंत रोक लगाकर नियमित शिक्षकों को बढ़े हुए वेतन पर फिक्स किया जाए।

सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC

UPTET news