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सहायक प्रोफेसर बनने को छह शर्ते

राज्य ब्यूरो, शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम अपना लिए हैं। यूजीसी की छह शर्ते पूरी करने वाले पीएचडी धारक ही प्रदेश विवि में सहायक प्रोफेसर लग सकेंगे। वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करने वाला अभ्यर्थी इन शर्तो को पूरा करने पर ही नेट में छूट के साथ शिक्षक बनने के लिए पात्र होगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने वीरवार को बैठक में यूजीसी के सभी नियमों को अपनाने पर स्वीकृति की मुहर लगाई। इस साल चार मई को अधिसूचित यूजीसी विनियम 2010 के तृतीय संशोधन को ईसी ने विवि में लागू करने की स्वीकृति प्रदान की है। अब इन्हीं छह शर्तो के आधार पर विवि में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती होगी।
वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करने वालों को यूजीसी की ओर से नेट में छूट दी है। शिक्षकों की भर्ती के लिए नेट-सेट और यूजीसी अधिनियम 2009 की 11 शर्ते लागू की थी। ऐसे में उन अभ्यर्थियों का भविष्य खतरे में पड़ गया था, जिन्होंने यूजीसी अधिनियम 2009 के तहत पीएचडी नहीं की है। इन शर्तो में से छह को लागू करने का निर्णय ईसी ने लिया है।
बैठक में 2013-14 के वार्षिक प्रतिवेदन को भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में प्रति-कुलपति आचार्य राजेंद्र सिंह चौहान, राकेश कुमार उच्चतर शिक्षा सचिव हिमाचल, दिनकर बुराथोकी निदेशक उच्चतर शिक्षा, कुलसचिव डॉ. पंकज ललित, आचार्य हिम चटर्जी, आचार्य एमएस चौहान, प्रो. जेबी नड्डा, डॉ. श्यामा जोशी, डॉ. कृष्ण वैद्य व राजकुमारी उपस्थित रहे।
नियम समझने व अध्ययन के लिए कमेटी गठित
यूजीसी के नियमों को अपनाने के साथ ईसी ने निर्णय लिया है कि भर्ती प्रक्रिया में पात्र उम्मीदवारों को किस आधार पर अस्थायी प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। ईसी ने विवि से 2009 से पीएचडी प्राप्त उम्मीदवारों को जारी अस्थायी प्रमाण पत्रों के विषय में उच्चतम न्यायालय के पी सुशीला मामले में बीते वर्ष 16 मार्च को दिए निर्णय को लागू करने का निर्णय लिया है। ईसी ने यूजीसी के इन नए नियमों को अपनाते हुए और इसका अध्ययन करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया। प्रो वीसी प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में बनी यह कमेटी स्थायी प्रमाण पत्रों वैद्यता संबंधी मामले का अध्ययन करेगी।
यह हैं यूजीसी की छह शर्ते
-निजी डिग्री मान्य नहीं होगी, इसलिए पीएचडी रेगुलर आधार पर होनी अनिवार्य है।
-अपने विश्वविद्यालय के अलावा दूसरे राज्यों की विवि से आए दो परीक्षकों ने छात्र के थिसीस का मूल्यांकन किया हो।
-किसी समारोह में दो प्रस्तुति दी हो और उम्मीदवार की थिसीस कुलपति, प्रति कुलपति या डीन से प्रमाणित होना जरूरी है।
-छात्र द्वारा किए शोध कहीं छपना अनिवार्य है, जिसमें से एक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित हो।
-मौखिक साक्षात्कार अनिवार्य है।

-ओपन वायवा होना चाहिए।
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