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शिक्षा विभाग के खिलाफ कपड़े उतार कर किया विरोध

शिमला: प्रदेश सरकार चाहे शिक्षा में सुधार की व आधुनिक शिक्षा देने की बात करे लेकिन शिक्षा के नाम पर प्रदेश के सिरमौर जिला में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। सिरमौर जिला के शिलाई क्षेत्र के पाब प्राइमरी स्कूल में पिछले 9 वर्षों से एक भी अध्यापक तैनात नहीं है।
सिरमौर जिला का यह प्राथमिक स्कूल पाब डैपुटेशन पर आने वाले एक टीचर के ही सहारे चल रहा है जिस कारण सैंकड़ों बच्चे शिक्षा से महरूम हो रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा डैपुटेशन में एक पैट अध्यापक को स्कूल भेजा जाता है और स्कूल खोलकर बच्चों को खिचड़ी खिलाने के बाद स्कूल को बंद किया जाता है। शिक्षा विभाग की इस अनदेखी के चलते इस स्कूल में पढऩे वाले 46 दलित बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है।

वीरवार को शिक्षा विभाग द्वारा सिरमौर जिला में शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे भेदभाव से खिन्न होकर पत्रकार सम्मेलन में अखिल भारतीय हरिजन लीग के उपाध्यक्ष केदार सिंह जिदान ने प्रैस वार्ता में ही कपड़े उतार कर अपना विरोध प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्कूल पाब के भवन की हालत भी इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी स्कूल का भवन गिर सकता है। हालांकि सरकार द्वारा हर वर्ष स्कूल भवन की मुरम्मत के लिए बजट दिया जाता है लेकिन सिरमौर शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर बैठे अफसर पैसों का गबन कर मुरम्मत के नाम पर स्कूल में एक भी पैसा खर्च नहीं करते हैं।


सिरमौर शिक्षा विभाग में हो रहे इस भ्रष्टाचार को लेकर मजबूरन ग्रामीणों को स्कूल बंद कर ताले जडऩे पड़े क्योंकि ग्रामीणों को हमेशा डर सताता रहता है कि कहीं स्कूल भवन के गिरने से उनके बच्चों के साथ कोई घटना न हो जाए। शिक्षा विभाग ने सिरमौर में भ्रष्टाचार कर इस गांव के दलितों के कपड़े उतार दिए हैं। उन्होंने कहा कि सिरमौर में शिक्षा के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 72 घंटे के अंदर अगर प्रदेश सरकार ने स्कूल की खस्ता हालत को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया तो शिक्षा विभाग के खिलाफ उच्च न्यायालय में पी.एल.आई. दायर की जाएगी।
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