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शिक्षा विभाग ने बदल दिए बैचवाइज भर्ती के मायने

शिमला: बैचवाइज हो रही शास्त्री प्रक्रिया में शिक्षा विभाग कानूनों का कुछ इस तरह पालन कर रहा है कि बैचवाइज में वरिष्ठता के आधार पर योग्य लोगों को नजरअंदाज किया जा सके। नए आर.एंड पी. रूल्स के हिसाब से मूल प्रमाण पत्र को अर्हता का आधार माना गया था।
2010 से पूर्व जिन लोगों ने शास्त्री की परीक्षा उत्तीर्ण की थी उनका क्रम बैचवाइज प्रक्रिया में चल रहा था लेकिन नए आर. एंड पी. रूल्स ने 50 प्रतिशत और टैट की शर्त अध्यापन के लिए लाजिमी कर दी जिससे हजारों बैचवाइज नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले शास्त्री डिग्री होल्डरों को तगड़़ा झटका लगा था लेकिन प्रशासन ने उनकी इस दिक्कत को विशेष श्रेणी सुधार का अवसर देकर दूर कर दिया।

उसके बाद टैट करने के बाद वे बैचवाइज में नौकरी हासिल करने के योग्य हो गए थे लेकिन विभाग आर. एंड पी. रूल्स का हवाला देकर नियमों को कुछ इस तरह से प्रस्तुत कर रहा है कि बैचवाइज की मूल भावना के अनुरूप योग्य वरिष्ठता को अधिमान देने की नीति को ही पलट दिया जाए और पुराने लोग 10 साल बाद इस फेहरिस्त में शामिल हों और वे इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो जाएं, ऐसे में कुछ पुराने शास्त्री दावा कर रहे हैं कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि विभाग अपने चहेतों को मौका दिला पाए। गौरतलब है कि 2010 में बने आर. एंड पी. रूल्स से पूर्व तो मूल प्रमाण के हिसाब से अध्यापन की अर्हता रखते थे तो फिर नए नियमों में उन वर्षों को क्यों घटाया नहीं गया जो नए नियमों में लागू होते हैं।

उनका कहना है कि जब नए रूल्स बनते हैं तो उससे पुराने कानूनों के आधार पर प्राप्त अर्हता निरस्त नहीं होनी चाहिए। इस हिसाब से अगर नए आर. एंड पी. रूल्स टैट पास वर्षों की अर्हता को आधार मानें तो इस हिसाब से तो नए लोगों को भी मौका नहीं मिल पाएगा, वहीं विभाग ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि पुराने शास्त्रियों का एक ओर तो सिलेबस बेहद कठिन था, दूसरी ओर 50 प्रतिशत लोगों का आंकड़ा भी लगभग नगण्य ही था, ऐसे में बिना सोचे-समझे तोड़-मरोड़ कर नियमों को लागू करने के प्रति पुराने शास्त्रियों में भारी रोष है।


शास्त्री बेरोजगार संघ के अध्यक्ष लेखराज का कहना है कि एन.सी.टी.ई. के प्रावधानों के अनुसार नए आर.एंड.पी. रूल्स में पुराने अभ्यर्थियों को छूट प्रदान की जा सकती है। उनका कहना है कि यू.जी.सी. ने भी पासआऊट वर्ष को ही श्रेणी सुधार की अपेक्षा मान्यता प्रदान की है जबकि शिक्षा विभाग इसके विपरीत काम कर रहा है। उनका कहना है कि पीएच.डी. डिग्री धारकों के साथ भी यह सीधा अन्याय है क्योंकि उनके पास डिग्री तो है लेकिन नए नियमों ने उनको भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन योग्यता की अनदेखी करके उनका शोषण कर रहा है।
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