हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बीएड धारक शास्त्री शिक्षक मामले में फैसला सुरक्षित रखा लिया है। मामले को न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। दोनों पक्षों ने
अपनी-अपनी दलीलें अदालत के समक्ष पूरी कीं। बीएड धारक शास्त्री शिक्षक सतीश कुमार और अन्य ने दलील दी कि सरकार ने शास्त्री शिक्षक के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में एनसीटीई की अधिसूचना के तहत जरूरी संशोधन नहीं किया है। एनसीटीई ने 2011 में अधिसूचना जारी कर शास्त्री शिक्षक के लिए बीएड की अनिवार्य योग्यता रखी है। सरकार अधिसूचना के तहत भर्ती एवं पदोन्त्ति नियमों में जरूरी संशोधन करने के लिए बाध्य है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आदर्श वशिष्ठ ने दलील दी कि सरकार ने बिना संशोधन शास्त्री कोड-813 के तहत शास्त्री शिक्षकों के 582 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इससे याचिकाकर्ता जैसे बीएड धारक शास्त्री शिक्षक बनने से वंचित रह जाएंगे, जबकि वे एनसीटीई की अधिसूचना के तहत जरूरी योग्यता रखते हैं।शास्त्री के 582 पदों की भर्ती प्रक्रिया में चयनित उम्मीदवारों के अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा ने दलील दी कि एनसीटीई की वर्ष 2011 में जारी अधिसूचना नियमों के विपरीत है। एनसीटीई नियमों का हवाला देते हुए दलील दी गई कि एनसीटीई स्वयं एक शिक्षक की योग्यता निर्धारित करने में सक्षम है। एनसीटीई ने नियमों को दरकिनार कर केंद्र सरकार कि सिफारिश पर शास्त्री शिक्षक के लिए बीएड की अनिवार्य योग्यता निर्धारित की है। सरकार के महाधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षक की योग्यता निर्धारित करने के लिए सरकार सक्षम है। सरकार ने शास्त्री शिक्षक के भर्ती एवं पदोन्त्ति नियम एनसीटीई की वर्ष 2010 की अधिसूचना के तहत ही बनाए हैं। दलील दी गई कि पद पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। चयन आयोग ने वर्ष 2020 में शास्त्री शिक्षकों के 1182 पद विज्ञापित किए थे। ये पद 50 प्रतिशत बैचवाइज और 50 प्रतिशत सीधी भर्ती से भरे जाने थे। हालांकि, इनमें 582 पद विभाग ने बैचवाइज भरे हैं, लेकिन आयोग से भरे जाने वाले 582 पदों पर शिक्षकों को नियुक्ति नहीं दी गई है। 23 दिसंबर, 2021 को आयोग ने उक्त पोस्ट कोड का परिणाम घोषित किया था।