डीपीई संघ ने सरकार
से वर्ष 2007 के बजट भाषण में सभी डीपीई को प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा का
पद्नाम देने की घोषणा पर अमल करने का आग्रह किया है। संघ के पदाधिकारियों
और सदस्यों का कहना है कि शारीरिक शिक्षक एक प्रवक्ता की भांति काम कर रहे
हैं। उन्हें न तो प्रवक्ता पद्नाम दिया जा रहा है और ना ही प्रवक्ताओं को
मिलने वाले वित्त लाभ मिल रहे हैं। ऐसे में डीपीई संघ में रोष है। चुनाव से
पहले संघ की लंबित मांगों को पूरा करने की मुख्यमंत्री से मांग उठाई है।
संघ के प्रधान मोहन चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शेर
सिंह, महासचिव ममता ठाकुर, मुख्य संरक्षक कमलेश कुमार, सलाहकार वेद नेगी,
कार्यालय सचिव हेम कुमार शर्मा, संगठन सचिव मोहिंद्र राठौर, मुख्य सलाहकार
सरला ठाकुर, वित्त सचिव भोपाल सिंह, उपाध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता, सह सचिव
जयपाल, प्रेस सचिव बेलम चौहान, संयुक्त सचिव सपना विष्ट, प्रचार सचिव नरेश
कंवर, कानूनी सलाहकार संतोष कुमार, सुनीता ग्रोवर, लेखाकार विकास सकलानी और
सुनीता ठाकुर ने मुख्यमंत्री से लंबित पड़ी मांग पर विचार करने की मांग की
है। डीपीई पिछले 17 वर्षों से जमा एक और जमा दो में शारीरिक शिक्षा को एक
विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं।
इसके अलावा वह विषय के साथ सुबह की प्रार्थना सभा, खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना, विद्यालय के अनुशासन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन फिर भी शिक्षा विभाग ने स्कूल में कार्यरत डीपीई को तीन वर्गों में बांट दिया है। इसमें एक वर्ग को 5400, दूसरे को 5000 और तीसरे को 3200 का ग्रेड पे दिया जा रहा है। इस कारण इस वर्ग में आक्रोश की भावना है। संघ ने मांग की है कि वर्ष 2007 के बजट भाषण में शारीरिक शिक्षकों को प्रवक्ता पद्नाम देने की घोषणा पर अमल किया जाए।
इसके अलावा वह विषय के साथ सुबह की प्रार्थना सभा, खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना, विद्यालय के अनुशासन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन फिर भी शिक्षा विभाग ने स्कूल में कार्यरत डीपीई को तीन वर्गों में बांट दिया है। इसमें एक वर्ग को 5400, दूसरे को 5000 और तीसरे को 3200 का ग्रेड पे दिया जा रहा है। इस कारण इस वर्ग में आक्रोश की भावना है। संघ ने मांग की है कि वर्ष 2007 के बजट भाषण में शारीरिक शिक्षकों को प्रवक्ता पद्नाम देने की घोषणा पर अमल किया जाए।