धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश मुख्याध्यापक
प्रधानाचार्य संवर्ग अधिकारी वर्ग का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश मुख्य
सलाहकार केके गुप्ता जिला उपनिदेशक की अगुवाई में मुख्यमंत्री से मिला। संघ
ने मुख्यमंत्री को अपनी मांगों से अवगत करवाया।
उन्होंने प्रधानाचार्य पदोन्नति के लिए मुख्याध्यापक से आर एंड पी नियम 1998 के तहत कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की। क्योंकि वर्तमान में मुख्याध्यापक के फीडर कैडर टीजीटी में करीब 31सौ के करीब है। जबकि सीधी भर्ती प्रवक्ता की संख्या लगभग 45 सौ है।
राज्य में प्रधानाचार्य व मुख्याध्यापों के लगभग 300 रिक्त पद हैं। इन पदों को केवल नियमित पदोन्नति के माध्यम से ही भरा जा सकता है। इसके अतिरिक्त एडहोकए प्लेसमेंट और होल्ड इन चार्च पर 2008 के बाद कार्य कर रहे प्रधानाचार्य को नियंमित करनाए पदोन्नत मुख्याध्यापकों की वेतन विसंगति दूर करनाए निरीक्षण वर्ग में मुख्याध्यापकों को शामिल करना, नए अपग्रेड हाई स्कूलों में मुख्याध्यापकों की वित्तिय शक्तियां बहाल करना, हाई स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा का विषय शुरू करना तथा कंप्यूटर शिक्षक की नियुक्ति करना आदि मांगें भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
संघ ने यह भी मांग की कि शिक्षकों को गैर शिक्षण कार्यों से हटाकर शिक्षण कार्यों में लगाकर शिक्षा की गुणवता पर बल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संघ को आश्वासन दिया कि शिक्षा हित में उनकी मांगों को पूर्ण किया जाएगा।
उन्होंने प्रधानाचार्य पदोन्नति के लिए मुख्याध्यापक से आर एंड पी नियम 1998 के तहत कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की। क्योंकि वर्तमान में मुख्याध्यापक के फीडर कैडर टीजीटी में करीब 31सौ के करीब है। जबकि सीधी भर्ती प्रवक्ता की संख्या लगभग 45 सौ है।
राज्य में प्रधानाचार्य व मुख्याध्यापों के लगभग 300 रिक्त पद हैं। इन पदों को केवल नियमित पदोन्नति के माध्यम से ही भरा जा सकता है। इसके अतिरिक्त एडहोकए प्लेसमेंट और होल्ड इन चार्च पर 2008 के बाद कार्य कर रहे प्रधानाचार्य को नियंमित करनाए पदोन्नत मुख्याध्यापकों की वेतन विसंगति दूर करनाए निरीक्षण वर्ग में मुख्याध्यापकों को शामिल करना, नए अपग्रेड हाई स्कूलों में मुख्याध्यापकों की वित्तिय शक्तियां बहाल करना, हाई स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा का विषय शुरू करना तथा कंप्यूटर शिक्षक की नियुक्ति करना आदि मांगें भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
संघ ने यह भी मांग की कि शिक्षकों को गैर शिक्षण कार्यों से हटाकर शिक्षण कार्यों में लगाकर शिक्षा की गुणवता पर बल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संघ को आश्वासन दिया कि शिक्षा हित में उनकी मांगों को पूर्ण किया जाएगा।