शिमला: अनुबंध
से नियमित होने पर सालाना इन्क्रीमैंट में कटौती को लेकर सरकार के फैसले
को शिक्षकों ने ट्रिब्यूनल में चुनौती दी है। इसको लेकर शिक्षकों की ओर से
कोर्ट में याचिका दायर की गई है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अपनी मर्जी
से शिक्षकों के वित्तीय लाभ में कटौती कर रही है।
इसमें इनिशियल-पे और 5
साल में दी गई सालाना इन्क्रीमैंट में की जा रही कटौती शामिल है। शिक्षकों
का कहना है कि बार-बार सरकार से आग्रह करने के बाद भी इसमें कोई उचित
कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते अब शिक्षकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
है।नियुक्ति तिथि से दी जाए शिक्षकों को वरिष्ठता
नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता के मामले में भी शिक्षकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। नियुक्ति तिथि से ही शिक्षकों को वरिष्ठता देने, अर्न लीव को शिक्षकों के खातों में क्रैडिट करने व अन्य वित्तीय लाभ देने के मामले को लेकर शिक्षक कोर्ट गए हैं। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने बताया कि संघ ने शिक्षकों के अधिकारों को बहाल करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संघ को उम्मीद है कि कोर्ट से शिक्षकों को न्याय मिलेगा।