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शिक्षकों को आवास गैर शिक्षकों को नहीं

एचपीयूनिवर्सिटी में पिछले कई वर्षों से गैर शिक्षक आवास मिलने की लड़ाई लड़ रहे हंै। हालांकि, उनका यह सपना पूरा होता हुआ दिख रहा है, लेकिन कब तक आवास बनकर तैयार होंगे इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। एचपीयू में गैर शिक्षकों के लिए चैरिटन इस्टेट में 12 आवासीय क्वार्टरों के लिए भी निर्माण कार्य आरंभ करने की पहल की है।
इससे चार मंजिला भवन में प्रत्येक में तीन-तीन कर्मचारी क्वाटर बनाए जाएंगे। माॅडल स्कूल के भवन के साथ इन पर लगभग चार करोड़ रुपए खर्च होंगे। सवाल यह है कि पिछले कई वर्षों से आवास की मांग कर रहे गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए अभी तक अावास क्यों नहीं बनाए गए। शिक्षकों से ज्यादा गैर शिक्षक एचपीयू में सेवाएं दे रहे हैं। विवि में शिक्षकों के लिए पहले से ही आवास बनाए गए हंै। गैर शिक्षकों ने इस मामले को जहां कई बार कुलपति के सामने रखा, वहीं ईसी में भी इस मुद्दे पर बहस हो चुकी है। ऐसे में इस बार गैर शिक्षकों के चुनाव का भी यह मुख्य मुद्दा था। एचपीयू के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी का कहना है कि जल्द ही कर्मचारियों को नए मकान की सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएगी।

परीक्षा से लेकर रिजल्ट निकालने का सारा जिम्मा गैर शिक्षकों पर होता है। कई शिक्षक तो देर रात तक ओवरटाइम काम करते हैं। विवि में करीब 900 शिक्षक है। ऐसे में प्रोफेसरों की तुलना में गैर शिक्षकों की संख्या अधिक है। ऐसे में ये कर्मचारी चाहते है उन्हें आवास मिले। कर्मचारियों के लिए यह अंबेडकर भवन चेरिटिन इस्टेट में आवास बनाए गए हंै। उसमें भी 15 से 20 आवास तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को आबंटित किए हैं

25 साल तक मैरिट के लिए इंतजार

एचपीयूके वरिष्ठ कर्मचारी नरेश कुमार शर्मा कहते हंै कि कुछ कर्मचारियों को ही आवास प्रदान किए गए हैं। कई कर्मचारी ऐसे हंै जो 25 वर्षों से मकान मिलने की राह देख रहे हैं। मैरिट के हिसाब से मकान मिलते हैं। ऐसे में मकानों की संख्या कम होने के कारण कुछ ही लोगों को मकान मिल पा रहे हैं। उनका कहना है कि जो मकान विवि की ओर से बनाए जाने हंै, उससे कुछ हद तक उनकी समस्या हल होगी। एेसे में इसके काम में तेजी लानी चाहिए।

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