राज्यकेसरकारी स्कूलों में तैनात 3400 प्राथमिक सहायक शिक्षकों (पैट) के
इंक्रीमेंट पर फिलहाल रोक लग गई है। शिक्षकों को अक्टूबर के वेतन यानि
नवंबर में 3 फीसदी इंक्रीमेंट मिलनी थी।
विधानसभा चुनावों को लेकर अाचार संहिता लगने से ठीक पहले सरकार ने ये फैसला लिया था। इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दी गई थी।
फैसला तीन अक्टूबर का था। नोटिफिकेशन जारी करने में आला अधिकारियों ने बड़ी लापरवाही की है। नोटिफिकेशन में इसका जिक्र ही नहीं किया गया है कि इंक्रीमेंट देना कब से हैं।
कांगड़ाके कुछ ब्लॉक ने जारी कर दी इंक्रीमेंट : नवंबरसे देनी है या मार्च से। पैट टीचरों का जिला कैडर होता है, सैलरी जिला स्तर पर तैयार होती है। कांगड़ा जिला के कुछ ब्लॉक ने इंक्रीमेंट जारी कर दी। अधिसूचना में जिक्र होने के चलते अन्य जिलों ने इंक्रीमेंट जारी ही नहीं की गई।
कुछेक ब्लॉक में इंक्रीमेंट जारी होने के बाद विवाद हो गया। मामला तूल पकड़ने के बाद विभाग ने इस प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। डिप्टी डायरेक्टर की ओर से शिक्षा निदेशालय को पत्र जारी कर क्लेरीफिकेशनमांगी गई है। इसमें पूछा गया है कि ये इंक्रीमेंट इन टीचरों को कब से दी जाए।
कोर्टकेस की वजह से नहीं हो पाए रेगुलर: राज्यसरकार ने बजट भाषण में पैट शिक्षकों को रेगुलर करने की घोषणा की थी। शिक्षक पिछले काफी समय से सरकार से नियमितिकरण की आस लगाए हुए हैं।
इन टीचरों का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते इन्हें रेगुलर नहीं किया जा सका है। सरकार ने शिक्षकों को रेगुलर करने के बजाए इंक्रीमेंट देने का निर्णय लिया, लेकिन इसे भी लागू नहीं किया जा सका है। इधर सरकार ने पैट टीचरों के लिए छुट्टियों की व्यवस्था भी कर दी है।
घोषणा पत्र में भी दिया है आश्वासन
कांग्रेसने अपने विधानसभा चुनावी घोषणा पत्र में भी इन शिक्षकों को आश्वासन दिया है। पार्टी ने कहा कि यदि वह सत्ता में आते हैं तो इन शिक्षकों के लिए पॉलिसी बनाकर रेगुलर किया जाएगा। इनमें जो टीचर शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते उन्हें 2019 तक शैक्षणिक योग्यता पूरी करने को कहा गया है।
घोषणा के बाद भी रेगुलर नहीं हो पाए अध्यापक
प्राथमिकसहायक शिक्षक (पैट) की नियुक्ति वर्ष 2003 से 2007 के बीच हुई थी। राज्य सरकार ने पैट पॉलिसी बनाई थी। इसके तहत इन शिक्षकों की नियुक्तियां की गई थी। इनमें कई टीचर ऐसे थे जो एनसीटीई नियमों के तहत क्वालिफिकेशन पूरी नहीं करते थे। प्रदेश सरकार ने बजट में इन टीचरों को रेगुलर करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक सरकार इन टीचरों को रेगुलर नहीं कर पाई है।
इनको अभी मिलता है 21,500 रुपए वेतन
स्कूलोंमें तैनात इन शिक्षकों को फिक्स मानदेय मिलता है। 21,500 मासिक मानदेय विभाग इन शिक्षकों को देता है। 3 फीसदी एनुअल इंक्रीमेंट तब तक मिलनी है जब तक विभाग इन टीचरों को रेगुलर नहीं कर देता। इससे इनके वेतन में प्रति महीने 650 रुपए की बढ़ोतरी होगी। हर साल ये इंक्रीमेंट लगाई जाएगी। इससे सरकार के खजाने पर 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोझ पड़ने का अनुमान है।
अब आचार संहिता में उलझ गया है मामला
विधानसभाचुनावों से पहले ये निर्णय लिया गया है। इसे जारी करने में हुई देरी के चलते ये मामला आचार संहिता के फेर में उलझ कर रह गया है। शिक्षा विभाग अपने स्तर पर अभी फिलहाल कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। इसकी फाइल सरकार को भेजी गई है। सरकार से परमिशन आने के बाद ही ये लाभ दिया जाएगा। ऐसे में शिक्षकों को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
विधानसभा चुनावों को लेकर अाचार संहिता लगने से ठीक पहले सरकार ने ये फैसला लिया था। इसको लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दी गई थी।
फैसला तीन अक्टूबर का था। नोटिफिकेशन जारी करने में आला अधिकारियों ने बड़ी लापरवाही की है। नोटिफिकेशन में इसका जिक्र ही नहीं किया गया है कि इंक्रीमेंट देना कब से हैं।
कांगड़ाके कुछ ब्लॉक ने जारी कर दी इंक्रीमेंट : नवंबरसे देनी है या मार्च से। पैट टीचरों का जिला कैडर होता है, सैलरी जिला स्तर पर तैयार होती है। कांगड़ा जिला के कुछ ब्लॉक ने इंक्रीमेंट जारी कर दी। अधिसूचना में जिक्र होने के चलते अन्य जिलों ने इंक्रीमेंट जारी ही नहीं की गई।
कुछेक ब्लॉक में इंक्रीमेंट जारी होने के बाद विवाद हो गया। मामला तूल पकड़ने के बाद विभाग ने इस प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। डिप्टी डायरेक्टर की ओर से शिक्षा निदेशालय को पत्र जारी कर क्लेरीफिकेशनमांगी गई है। इसमें पूछा गया है कि ये इंक्रीमेंट इन टीचरों को कब से दी जाए।
कोर्टकेस की वजह से नहीं हो पाए रेगुलर: राज्यसरकार ने बजट भाषण में पैट शिक्षकों को रेगुलर करने की घोषणा की थी। शिक्षक पिछले काफी समय से सरकार से नियमितिकरण की आस लगाए हुए हैं।
इन टीचरों का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते इन्हें रेगुलर नहीं किया जा सका है। सरकार ने शिक्षकों को रेगुलर करने के बजाए इंक्रीमेंट देने का निर्णय लिया, लेकिन इसे भी लागू नहीं किया जा सका है। इधर सरकार ने पैट टीचरों के लिए छुट्टियों की व्यवस्था भी कर दी है।
घोषणा पत्र में भी दिया है आश्वासन
कांग्रेसने अपने विधानसभा चुनावी घोषणा पत्र में भी इन शिक्षकों को आश्वासन दिया है। पार्टी ने कहा कि यदि वह सत्ता में आते हैं तो इन शिक्षकों के लिए पॉलिसी बनाकर रेगुलर किया जाएगा। इनमें जो टीचर शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते उन्हें 2019 तक शैक्षणिक योग्यता पूरी करने को कहा गया है।
घोषणा के बाद भी रेगुलर नहीं हो पाए अध्यापक
प्राथमिकसहायक शिक्षक (पैट) की नियुक्ति वर्ष 2003 से 2007 के बीच हुई थी। राज्य सरकार ने पैट पॉलिसी बनाई थी। इसके तहत इन शिक्षकों की नियुक्तियां की गई थी। इनमें कई टीचर ऐसे थे जो एनसीटीई नियमों के तहत क्वालिफिकेशन पूरी नहीं करते थे। प्रदेश सरकार ने बजट में इन टीचरों को रेगुलर करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक सरकार इन टीचरों को रेगुलर नहीं कर पाई है।
इनको अभी मिलता है 21,500 रुपए वेतन
स्कूलोंमें तैनात इन शिक्षकों को फिक्स मानदेय मिलता है। 21,500 मासिक मानदेय विभाग इन शिक्षकों को देता है। 3 फीसदी एनुअल इंक्रीमेंट तब तक मिलनी है जब तक विभाग इन टीचरों को रेगुलर नहीं कर देता। इससे इनके वेतन में प्रति महीने 650 रुपए की बढ़ोतरी होगी। हर साल ये इंक्रीमेंट लगाई जाएगी। इससे सरकार के खजाने पर 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोझ पड़ने का अनुमान है।
अब आचार संहिता में उलझ गया है मामला
विधानसभाचुनावों से पहले ये निर्णय लिया गया है। इसे जारी करने में हुई देरी के चलते ये मामला आचार संहिता के फेर में उलझ कर रह गया है। शिक्षा विभाग अपने स्तर पर अभी फिलहाल कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। इसकी फाइल सरकार को भेजी गई है। सरकार से परमिशन आने के बाद ही ये लाभ दिया जाएगा। ऐसे में शिक्षकों को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।