शिमला, राज्य ब्यूरो। प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की
हाजिरी अब बायोमीट्रिक प्रणाली से लगेगी। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने
स्कूलों से नदारद रहने वाले शिक्षकों पर शिंकजा कसने के लिए यह निर्णय लिया
है।
विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिला ऊना और सोलन के कुछ स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाई गई थीं।
सिरमौर के शिलाई में एक स्कूल के दो शिक्षकों के गायब रहने के मामले के बाद प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने सभी प्राथमिक स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाने के लिए बैठक की गई थी। इसमें आइटी कंपनी के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक में निर्णय लिया है कि पहले फेज में सात हजार केकरीब स्कूलों में मशीनों को नए शैक्षणिक सत्र में लगा दिया जाएगा। इस साल विभाग ने ट्रायल बेस पर ऊना और सोलन जिला के 10-10 स्कूलों में इन मशीनों को लगाया गया था। विभाग का यह प्रयास सफल रहा। विभाग के पास इन मशीनों को लगाने के लिए बजट की भी कोई कमी नहीं है।
बैठक में उत्तराखंड के मॉडल पर भी चर्चा की गई। उत्तराखंड ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस को जीपीएस लोकेशन से जोड़ा है, लेकिन इस मॉडल में कुछ दिक्कतें भी हैं जिसके चलते इस पर सहमति नहीं बन पाई। विभाग सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की तर्ज पर ही पहले चरण में बायोमेट्रिक मशीनें लगाने जा रहा है।
निदेशालय में बैठे अधिकारी भी देख सकेंगे हाजिरी
स्कूल में लेटलतीफ आने वाले और बिना बताए स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षकों पर निदेशालय में बैठे अधिकारियों की भी नजर रहेगी। प्राथमिक स्कूलों में लगने वाली बायोमीट्रिक मशीनें ऑनलाइन निदेशालय से अटैच की जाएंगी। अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर हर स्कूल की अटेंड्स को कभी भी चेक कर सकेंगे। दिनभर शिक्षा निदेशालय में घूमने वाले शिक्षक नेताओं पर भी लगाम लगेगी। विभाग उनकी अटेंडेंस देखकर उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाएगा।
विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिला ऊना और सोलन के कुछ स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाई गई थीं।
सिरमौर के शिलाई में एक स्कूल के दो शिक्षकों के गायब रहने के मामले के बाद प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने सभी प्राथमिक स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाने के लिए बैठक की गई थी। इसमें आइटी कंपनी के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक में निर्णय लिया है कि पहले फेज में सात हजार केकरीब स्कूलों में मशीनों को नए शैक्षणिक सत्र में लगा दिया जाएगा। इस साल विभाग ने ट्रायल बेस पर ऊना और सोलन जिला के 10-10 स्कूलों में इन मशीनों को लगाया गया था। विभाग का यह प्रयास सफल रहा। विभाग के पास इन मशीनों को लगाने के लिए बजट की भी कोई कमी नहीं है।
बैठक में उत्तराखंड के मॉडल पर भी चर्चा की गई। उत्तराखंड ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस को जीपीएस लोकेशन से जोड़ा है, लेकिन इस मॉडल में कुछ दिक्कतें भी हैं जिसके चलते इस पर सहमति नहीं बन पाई। विभाग सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की तर्ज पर ही पहले चरण में बायोमेट्रिक मशीनें लगाने जा रहा है।
निदेशालय में बैठे अधिकारी भी देख सकेंगे हाजिरी
स्कूल में लेटलतीफ आने वाले और बिना बताए स्कूल से गायब रहने वाले शिक्षकों पर निदेशालय में बैठे अधिकारियों की भी नजर रहेगी। प्राथमिक स्कूलों में लगने वाली बायोमीट्रिक मशीनें ऑनलाइन निदेशालय से अटैच की जाएंगी। अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर हर स्कूल की अटेंड्स को कभी भी चेक कर सकेंगे। दिनभर शिक्षा निदेशालय में घूमने वाले शिक्षक नेताओं पर भी लगाम लगेगी। विभाग उनकी अटेंडेंस देखकर उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाएगा।