जागरण संवाददाता, ऊना : राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने डीएलएड की शर्त का
विरोध किया है। संघ ने सरकार व शिक्षा विभाग से इस फैसले को लागू न करने की
गुहार लगाई है।
जिलाध्यक्ष बल¨वद्र सिह बैंस ने कहा कि विभाग व सरकार द्वारा जो शर्त डीएलएड करने की ग्रामीण विद्या उपासकों के ऊपर थोपी गई है, इसका जिला प्राथमिक शिक्षक संघ पूर्ण विरोध करता है। वास्तव में जब ग्रामीण विद्या उपासक अध्यापकों की नियुक्ति हुई थी उस समय प्राथमिक शिक्षकों को जेबीटी के पद पर नियुक्ति के लिए हिमाचल प्रदेश में डीएलएड नहीं करवाई जाती थी। सरकार द्वारा दो वर्ष का डाईट के माध्यम से प्रशिक्षण करवाया जाता था। यह प्रशिक्षण ग्रामीण विद्या उपासकों ने प्राप्त कर लिया है। इस प्रशिक्षण के आधार पर ही इन्हें विभाग व सरकार द्वारा नियमित किया गया था। इनका प्रशिक्षण सरकार द्वारा जारी किए गए नए प्रशिक्षण प्रपत्र से पहले पूर्ण हो चुका था। अब इन्हें नियमित हुए लगभग छह वर्ष हो चुके हैं। इनमें से कुछ अध्यापक टीजीटी पदों पर पदोन्नति ले चुके हैं। अब सरकार ग्रामीण विद्या उपासकों पर ऐसी शर्ते थोप रही है। डाईट के माध्यम से करवाए गए प्रशिक्षण पर विभाग स्वयं प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अगर डाईट के प्रशिक्षण मान्य नहीं हैं तो इनकी क्या आवश्यकता है, सरकार को ऐसे प्रशिक्षण संस्थान बंद कर देने चाहिए। करोड़ों रुपये सरकार इन प्रशिक्षण संस्थानों पर खर्च कर रही है। शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सरकार अध्यापकों पर नए नियम थोप रही है, ऐसे नियम लागू करना शिक्षा एवं शिक्षक हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार को अध्यापकों के हित के लिए समय रहते सही फैसला लेना होगा, अन्यथा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ धरना-प्रदर्शन करेगा। इस अवसर पर जिला महासचिव राकेश चंद्र शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान जोगिंद्र मियां, कोषाध्यक्ष स¨तदर मिन्हास, लेखाकार महेश शर्मा मौजूद रहे।
जिलाध्यक्ष बल¨वद्र सिह बैंस ने कहा कि विभाग व सरकार द्वारा जो शर्त डीएलएड करने की ग्रामीण विद्या उपासकों के ऊपर थोपी गई है, इसका जिला प्राथमिक शिक्षक संघ पूर्ण विरोध करता है। वास्तव में जब ग्रामीण विद्या उपासक अध्यापकों की नियुक्ति हुई थी उस समय प्राथमिक शिक्षकों को जेबीटी के पद पर नियुक्ति के लिए हिमाचल प्रदेश में डीएलएड नहीं करवाई जाती थी। सरकार द्वारा दो वर्ष का डाईट के माध्यम से प्रशिक्षण करवाया जाता था। यह प्रशिक्षण ग्रामीण विद्या उपासकों ने प्राप्त कर लिया है। इस प्रशिक्षण के आधार पर ही इन्हें विभाग व सरकार द्वारा नियमित किया गया था। इनका प्रशिक्षण सरकार द्वारा जारी किए गए नए प्रशिक्षण प्रपत्र से पहले पूर्ण हो चुका था। अब इन्हें नियमित हुए लगभग छह वर्ष हो चुके हैं। इनमें से कुछ अध्यापक टीजीटी पदों पर पदोन्नति ले चुके हैं। अब सरकार ग्रामीण विद्या उपासकों पर ऐसी शर्ते थोप रही है। डाईट के माध्यम से करवाए गए प्रशिक्षण पर विभाग स्वयं प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अगर डाईट के प्रशिक्षण मान्य नहीं हैं तो इनकी क्या आवश्यकता है, सरकार को ऐसे प्रशिक्षण संस्थान बंद कर देने चाहिए। करोड़ों रुपये सरकार इन प्रशिक्षण संस्थानों पर खर्च कर रही है। शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सरकार अध्यापकों पर नए नियम थोप रही है, ऐसे नियम लागू करना शिक्षा एवं शिक्षक हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार को अध्यापकों के हित के लिए समय रहते सही फैसला लेना होगा, अन्यथा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ धरना-प्रदर्शन करेगा। इस अवसर पर जिला महासचिव राकेश चंद्र शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान जोगिंद्र मियां, कोषाध्यक्ष स¨तदर मिन्हास, लेखाकार महेश शर्मा मौजूद रहे।