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केंद्र की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ संसद का घेराव करेंगे शिक्षक: चौहान

पुरानी पेंशन बहाल करना और ग्रेच्युटी प्रदान करना।

{पूरे देश में एक जैसी शिक्षा व्यवस्था प्रदान करना जिसमें सभी को समान सुविधाओं सहित कॉमन करिकुलम हो।


{शिक्षा के अधिकार को नर्सरी से प्लस{टू तक अनिवार्य करना और मुफ्त शिक्षा व्यवस्था मुहैया करवाना।

{प्री प्राइमरी एजुकेशन को स्कूलों का हिस्सा बनाना और सभी सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करना।

{बराबर कार्य बराबर वेतन को लागू करना।

{शिक्षकों से गैर शैक्षिक किसी भी प्रकार के कार्य लेना।

{आरएमएसए को एसएसए में मर्ज करने का विरोध। महासंघ का कहना है कि एसएसए का कार्य क्षेत्र आठवीं कक्षा तक है और आरएमएसए अभियान 9वीं से 12वीं कक्षा तक है।

{नियमित शिक्षकों को डीएलएड जैसे काेर्स करवाकर उन पर मानसिक बोझ एवं समय बर्बाद करना।

{सभी प्रकार की पार्ट टाइम नियुक्तियों को नियमित करना।

{सीसीई प्रणाली को समाप्त करना। पास फेल की पुरानी प्रणाली को दोबारा लागू करना।

{नई शिक्षा नीति लागू करने से पहले महासंघ को विश्वास में लेकर चर्चा की जाए।

भास्कर न्यूज | शिमला

अखिलभारतीय माध्यमिक शिक्षक महासंघ केंद्र सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ संसद का घेराव करेगा। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान ये घेराव किया जाएगा। महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दिल्ली में आयोजित बैठक में ये निर्णय लिया गया। राजकीय अध्यापक महासंघ के राज्य अध्यक्ष राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षक महासंघ के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने बताया कि शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर इस बैठक में चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसकी तारिक तय कर दी जाएगी। बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए। 

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