शिमला— जीरो रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को तबादला आदेशों
के साथ चार्जशीट किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस फेहरिस्त में 235 शिक्षकों
को चार्जशीट करने के आदेश पारित किए हैं।
इस आधार पर शिक्षा निदेशालय ने इस
सूची में शामिल सभी शिक्षकों को चार्जशीट जारी करने से पहले अपनी स्थिति
स्पष्ट करने का नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि साल भर की तमाम
सुविधाओं के बावजूद अगर उनके विषय में एक भी छात्र उत्तीर्ण नहीं है तो
क्यों न उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाए? अहम है कि इनमें मैट्रिक तथा
प्लस टू दोनों का परीक्षा परिणाम शामिल है। स्कूल शिक्षा बोर्ड के वार्षिक
परिणाम की तुलनात्मक रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि राज्य भर के जमा दो के
39 स्कूलों का रिजल्ट शून्य रहा है। इनमें 20 सरकारी तथा 19 प्राईवेट
स्कूल है। सरकारी स्कूलों में साइंस स्ट्रीम के मेडिकल व नॉन मेडिकल दोनों
संकाय शामिल है। इसके अलावा पॉलिटिकल साईंस और इकोनोमिक्स में भी कुछ
स्कूलों का शून्य रिजल्ट दर्ज हुआ है। इसके अतिरिक्त हिमाचल स्कूल शिक्षा
बोर्ड के 35 स्कूलों के छात्र मैट्रिक की परीक्षा में फेल हुए हैं। इनमें
भी सरकारी तथा निजी दोनों श्रेणियों के स्कूल शामिल है। राज्य सरकार ने
सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को चार्जशीट करने का फैसला लिया है। इससे पहले
इन सभी के तबादला आदेश जारी होंगे। चूंकि, प्राईवेट स्कूलों के अध्यापकों
के विरूद्ध इस तरह की कार्रवाई का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। इसके
चलते सरकार ने शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए प्राईवेट स्कूलों पर भी
शिकंजा कसने के लिए इनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। जाहिर है
कि निजी स्कूलों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड संबद्धता प्रदान करता
है। इसके लिए योग्य अध्यापकों की तैनाती की कड़ी शर्त निर्धारित की गई है।
लिहाजा जीरो रिजल्ट देने वाले प्राइवेट स्कूलों की संबद्धता पर स्कूल
शिक्षा बोर्ड को पुनर्विचार करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य
सरकार ने इन फिसड्डी स्कूलों की एनओसी रद्द करने का नोटिस भी संस्थानों को
जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शिक्षण संस्थान छात्रों के उज्ज्वल
भविष्य और बेहतर शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से खोले जाते हैं। इस आधार
पर निजी क्षेत्र को स्कूल खोलने के लिए हिमाचल सरकार से अनापत्ति प्रमाण
पत्र जारी किया है। चूंकि इस वर्ष स्कूल शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षा
में जमा दो तथा मैट्रिक का कोई भी छात्र उत्तीर्ण नहीं हुआ है। इस गंभीर
विषय को ध्यान में रखते हुए क्यों न राज्य सरकार आपको जारी की गई एनओसी
रद्द कर दें? इस नोटिस के आधार पर सरकार ने निजी स्कूलों से जवाब मांगा है।