शिमला.
राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात 16 हजार अस्थाई शिक्षकों को नियमित करने
का मामला एक बार फिर उलझ गया है। राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में
बिल लाकर इन टीचरों को नियमित करने की तैयारी में थी। शिक्षा
सचिव डा. अरुण शर्मा ने महाधिवक्ता (एजी) की राय मांगी थी।
इसमें पूछा गया था कि पिछले काफी समय से शिक्षा विभाग में पीटीए, पैट, पैरा और एसएमसी आधार पर शिक्षकों की तैनाती की गई है।
इन
टीचरों की तैनाती नियमित प्रोसेस के बजाए अस्थाई तौर पर कुछ समय के लिए की
गई थी। कई टीचर ऐसे हैं जो पिछले 12 से 15 सालों से विभाग में सेवाएं दे
रहे हैं। एजी ने सचिव शिक्षा को वापिस फाइल भेजी है। इसमें सचिव से पूछा है
कि जब सरकार इन्हें ग्रांट इन एड के तहत वेतन रेगुलर तौर पर जारी कर रही
है तो यह बैकडोर एंट्री कैसे हुई। यदि इन टीचरों की बैकडोर भर्ती हुई है तो
इन्हें ग्रांट इन एड के तहत वेतन कैसे दिया जा रहा है।
पात्र शिक्षकों के बाहर होने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती:याचिकाकर्ता ने साल 2013 में इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी। प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट मेंं चुनौती दी। सुप्रीमकोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए स्टेटस को रखने के आदेश जारी किए। राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब 16 हजार के करीब शिक्षक अस्थाई तौर पर तैनात हैं। इनमें 6500 पीटीए हैं। इसके अलावा पैरा 2200, पैट 3400, ग्रामीण विद्या उपासक 1500 और 2500 एसएमसी टीचर हैं। हालांकि साढ़े तीन हजार से ज्यादा पीटीए को अनुबंध पर ला दिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जो केस है उसके अनुसार इन्हें अस्थाई ही माना जाएगा।
शिक्षकों को ये हो रहा है नुकसान:सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण शिक्षकों के नियमितिकरण अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार ने रोक लगाई हुई है। शिक्षक पिछले काफी समय से राज्य सरकार से सशर्त रेगुलराइज करने की मांग कर रहे हैं। इन शिक्षकों के नियमित होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इनके विरुद्ध फैसला आता है तो इन्हें नौकरी से हटाया जा सकता है।
क्यों हो रही थी कसरत: राज्य सरकार अस्थाई शिक्षकों को नियमित या अनुबंध पर लाने की तैयारी में थी। भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में भी यह वादा किया था। विवादों से बचने के लिए विधानसभा में बिल लाया जाना था। इसके लिए एजी से राय मांगी गई थी। सरकार का यह पैंतरा खुद पर ही उल्टा पड़ता दिख रहा है। इन टीचरों की तैनाती स्टॉप गैप अरेंजमेंट थी। जब तक रेगुलर टीचर नहीं आ जाता तब तक इन्हें रखा जाएगा।
इसमें पूछा गया था कि पिछले काफी समय से शिक्षा विभाग में पीटीए, पैट, पैरा और एसएमसी आधार पर शिक्षकों की तैनाती की गई है।
पात्र शिक्षकों के बाहर होने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती:याचिकाकर्ता ने साल 2013 में इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान चहेतों को नौकरी दी गई है जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी। प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट मेंं चुनौती दी। सुप्रीमकोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए स्टेटस को रखने के आदेश जारी किए। राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब 16 हजार के करीब शिक्षक अस्थाई तौर पर तैनात हैं। इनमें 6500 पीटीए हैं। इसके अलावा पैरा 2200, पैट 3400, ग्रामीण विद्या उपासक 1500 और 2500 एसएमसी टीचर हैं। हालांकि साढ़े तीन हजार से ज्यादा पीटीए को अनुबंध पर ला दिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जो केस है उसके अनुसार इन्हें अस्थाई ही माना जाएगा।
शिक्षकों को ये हो रहा है नुकसान:सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण शिक्षकों के नियमितिकरण अनुबंध पर लाने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार ने रोक लगाई हुई है। शिक्षक पिछले काफी समय से राज्य सरकार से सशर्त रेगुलराइज करने की मांग कर रहे हैं। इन शिक्षकों के नियमित होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इनके विरुद्ध फैसला आता है तो इन्हें नौकरी से हटाया जा सकता है।
क्यों हो रही थी कसरत: राज्य सरकार अस्थाई शिक्षकों को नियमित या अनुबंध पर लाने की तैयारी में थी। भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में भी यह वादा किया था। विवादों से बचने के लिए विधानसभा में बिल लाया जाना था। इसके लिए एजी से राय मांगी गई थी। सरकार का यह पैंतरा खुद पर ही उल्टा पड़ता दिख रहा है। इन टीचरों की तैनाती स्टॉप गैप अरेंजमेंट थी। जब तक रेगुलर टीचर नहीं आ जाता तब तक इन्हें रखा जाएगा।