; paras[X - 1].parentNode.insertBefore(ad1, paras[X]); } if (paras.length > X + 4) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 3].parentNode.insertBefore(ad2, paras[X + 4]); } if (isMobile && paras.length > X + 8) { var ad1 = document.createElement('div'); ad1.className = 'ad-auto-insert ad-first'; ad1.innerHTML = ` ; paras[X + 7].parentNode.insertBefore(ad3, paras[X + 8]); } });

Important Posts

Advertisement

कम परिणाम के लिए शिक्षकों को दोषी मानना गलत: केसर

हिमाचल स्कूल प्रवक्ता संघ ने बिना स्पष्टीकरण लिए बोर्ड परीक्षाओं में कम परिणाम देने वाले शिक्षकों की वेतनवृद्धि रोकने के फैसले की निंदा की है। संघ के प्रधान केसर ठाकुर, महासचिव संजीव ठाकुर, कार्यकारी प्रधान राम कृष्ण मार्कंडेय और मुख्य प्रेस सचिव राजेंद्र शर्मा ने कहा कि परिणाम कम आने के कई कारण हैं।

विभाग को सभी कारणों का पता लगाकर इसके लिए सही नीति बनानी चाहिए। आठवीं तक फेल न करने की नीति का खामियाजा नौवीं कक्षा से भुगतना पड़ता है। इसके अलावा बहुत से स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद हैं। बीच सत्र में शिक्षकों के तबादले किए जाते हैं। इससे परीक्षा परिणाम पर विपरीत असर पड़ता है।

प्रधान केसर ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों से पूरा साल गैर शिक्षण कार्य करवाए जाने से छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है। आए दिन स्कूलों में महत्वपूर्ण दिवस, आला अधिकारियों के प्रोग्राम करवाए जाते हैं। इससे शिक्षण दिवस कम हो जाते हैं। विभाग की अन्य गतिविधियों, मूलभूत ढांचे की कमी भी खराब परीक्षा परिणाम के लिए उत्तरदायी हैं।

इन सभी कारणों पर अध्ययन कर ही सही परीक्षा परिणाम नीति बनानी चाहिए। किसी शिक्षक का परिणाम कई साल अच्छा रहता है। एक साल परिणाम कम आने पर शिक्षक को अयोग्य मान लेना गलत है। कम परिणाम देने वाले शिक्षकों को एक मौका देना चाहिए। शिक्षकों की वेतन वृद्धि को जारी किया जाना चाहिए।

UPTET news