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हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने सरकार से की इंक्रीमेैंट रोकने के फरमान को रद्द करने की मांग

सुंदरनगर : प्रदेश के स्कूलों में कम रिजल्ट आने पर शिक्षकों की इंक्रीमैंट रोकने का फरमान सरकार को तुरंत वापस लेना चाहिए। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने कहा कि प्रदेश में कम रिजल्ट के लिए अध्यापक ही कसूरवार नहीं हैं बल्कि स्कूलों में मूलभूत संरचना की कमी के साथ खाली पड़े पदों के लिए सरकार व विभाग भी जिम्मेदार हैं।
उक्त बातें महासंघ के प्रांत संगठन मंत्री पवन मिश्रा, अतिरिक्त महामंत्री विनोद सूद, विरेंद्र चड्ढा, प्रदेश मीडिया प्रभारी दर्शन लाल, मंडी जिला प्रधान भगत चंदेल, यशपाल व प्रकाश चंद ने संयुक्त बयान में सुंदरनगर में कहीं।

इस संबंध में प्रदेश मीडिया प्रभारी दर्शन लाल ने कहा कि कम रिजल्ट को लेकर शिक्षकों की इंक्रीमैंट रोकना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के साथ हुई बैठक में इस बात को प्रमुखता से रखा गया था, जिसमें अध्यापकों की सहभागिता से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने व नकल की प्रवृत्ति को रोकने के लिए 3 साल तक शिक्षकों को रिजल्ट बार से बाहर रखने पर सहमति बनी थी लेकिन अचानक इस तरह कम रिजल्ट को लेकर इंक्रीमैंट रोकने का फरमान प्रदेश में शिक्षकों के मनोबल को तोडऩे का काम करेगा, वहीं कम रिजल्ट से बचने के लिए मजबूरन नकल के चलन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सरकार से तुरंत इंक्रीमैंट रोकने के आदेशों को निरस्त करने की मांग की।

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