ऊना। अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को स्कूल में पहुंचने के लिए
बारिश में भीगना और ठंड में ठिठुरना नहीं पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने सरकारी
स्कूलों में नन्हें विद्यार्थियों को बरसात और सर्दियों में पेश आने वाली
दिक्कतों पर कड़ा संज्ञान लिया है।
इस संबंध में आम लोगों ने भी शिक्षा विभाग को सुझाव दिए हैं। इसमें कहा गया
है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बरसात और सर्दियों के दिनों में
विद्यालय पहुंचने के लिए भारी परेशानी होती है। इसके चलते शिक्षा विभाग ने
प्रदेश के ग्रीष्मकालीन स्कूलों की समय सारिणी को सर्दियों के मौसम में
प्रात: 9 बजे से 3 बजे के स्थान पर प्रात: 10 बजे से सायं 4 बजे तक करने
तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश को 26 जून से 31 जुलाई के स्थान पर प्रतिवर्ष 15
जुलाई से 31 अगस्त तक करने बारे शिक्षकों से सुझाव मांगे हैं। सर्दियों के
दिन छोटे और रातें बड़ी होती हैं। देरी होने के कारण विद्यार्थी भागते हुए
विद्यालय जाते हैं। शिक्षा विभाग ने अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रदेश
के सभी सरकारी स्कूलों के अध्यापकों व शिक्षक संघों से इस संबंध में सहमति
के लिए अपने-अपने सुझाव मांगें हैं। इसके चलते अध्यापकों को पढ़ाने और
विद्यार्थियों को पढ़ाने में किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े।
नौनिहालों को होगा ज्यादा लाभ
इस योजना का लाभ सबसे ज्यादा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नन्हे-मुन्हें
विद्यार्थियों को होगा। जिला ऊना में 520 प्राथमिक, 95 माध्यमिक, 48 उच्च व
199 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं।
अध्यापक संघों ने जताई सहमति
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ऊना के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोगिंद्र सिंह
कुटलैहड़िया ने कहा कि शिक्षा विभाग की सर्दियों में समयसारणी बदलने की
योजना विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए हितकारी होगी। हिमाचल प्रदेश
प्राध्यापक संघ के सदस्य सुचेंद्र स्याल ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा
सरकारी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश व सर्दियों में विद्यालय समयसारिणी
बदलने की योजना सराहनीय है।
शिक्षकों से मांगे सुझाव : गुलेरिया
जिला प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक एचआर गुलेरिया ने बताया कि निदेशालय की ओर
से इस योजना को चलाने के लिए अध्यापकों से सुझाव मांगे गए हैं। उसके बाद ही
निदेशालय उचित निर्णय लेगा।