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कहां से खरीदें वर्दी और किताबें, बाध्य न करें स्कूल

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : प्रदेश के निजी स्कूल में फीस बढ़ोतरी और वर्दी व किताबों के नाम पर शिक्षण संस्थानों द्वारा की जा रही लूट-खसूट के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग के निदेशक ने निजी स्कूलों को आदेश जारी किए हैं। जारी इस अधिसूचना में चार बिंदुओं पर निर्णय लिए गए हैं।

इसके तहत निदेशक ने प्राइवेट स्कूलों को फीसों के मामले में मनमानी पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूलों में नियम के तहत अभिभावकों व स्कूल अध्यापकों की पीटीए के गठित करने को भी कहा गया है। इसके अलावा वर्दी व किताबें स्कूल में न बेचने और दुकान विशेष से सामान खरीदने के लिए बाध्य न करने को कहा गया है। बच्चों के टूअर प्रोग्राम बनाने में अभिभावकों की स्वैच्छिक सहमति को भी अनिवार्य किया गया है।
प्रदेश में निजी स्कूलों की इस मनमानी के खिलाफ राज्य के कई जिलों में बच्चों के अभिभावक आंदोलन पर उतर आए थे। शिमला व सोलन में तो विभिन्न निजी स्कूलों के बच्चों के परिजनों ने संगठन बनाकर सड़क पर उतर गए थे। अभिभावकों ने इसे लेकर सरकार को भी आड़े हाथों लिया और मामले में राजनीतिक दलों की चुप्पी पर लोकसभा चुनाव के बहिष्कार की धमकी तक दे डाली थी। इसके चलते बीते दिनों शिमला में छात्र-अभिभावक मंच की शिक्षा निदेशक से बैठक हुई। इसमें यहां के साथ-साथ अन्य जिलों के मामले भी उठे। विभाग ने मामले में संज्ञान लेते हुए सोमवार को निजी स्कूलों के लिए आदेश जारी किए हैं।

ये हैं शिक्षा विभाग के आदेश

द्य स्कूल की फीस व निधियां शोषण करने वाली न होकर, शिक्षा के प्रसार में सहयोग देने वाली हों। स्कूलों की फीस वहां के कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन के विकास और छात्रों को दी जा रही सुविधाओं व क्रियाक्लापों के अनुरूप होनी चाहिए।
  1. सभी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 के अंतर्गत निर्मित नियम 2003 के अनुसार पीटीए का गठन किया जाए। माता-पिता में से दो तिहाई, जबकि अध्यापक वर्ग से एक तिहाई सदस्य शामिल किए जाएं।
  2.  निजी स्कूलों द्वारा बिना अनुमति के परिसर में वर्दी, किताबें-कापियां व जूते न बेचें जाएं। साथ ही किसी चिन्हित दुकान से भी सामान खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।
  3.  शैक्षणिक टूअर प्रोग्राम अभिभावकों की सहमति से तय किए जाएं। वहां के एसडीएम को भी अवगत करवाया जाए। इन टूअर को छात्रों के लिए अनिवार्य की जगह स्वैच्छिक किया जाए और इस दौरान बच्चों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

छात्र-अभिभावक मंच ने बताई जीत

शिमला के छात्र-अभिभावक मंच ने शिक्षा विभाग के इन आदेशों को प्रदेशभर के हजारों अभिभावकों के आंदोलन की जीत बताया है। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने 16 मार्च को निदेशक उच्चतर शिक्षा के साथ हुई बैठक के बाद अधिसूचना जारी करने का स्वागत किया है। यह भी मांग की है कि इस अधिसूचना को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।

उन्होंने शिक्षा सचिव को चेताया भी कि यदि प्राइवेट स्कूलों पर नकेल न लगाई गई तो मंच के पास निर्णायक आंदोलन के सिवा कोई चारा न होगा। सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा कि यदि तुरंत भारी फीसें-चार्ज करने वाले प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोक न लगाई गई तो मंच का आंदोलन उग्र होगा।

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