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शिक्षा का अधिकार अधिनियम की हो रही अवहेलना

संवाद सूत्र, सैंज : प्रदेश में जहां बच्चों की पढ़ाई को लेकर सरकार व शिक्षा विभाग की ओर से बड़े बड़े दावे किये जा रहे हैं। वहीं संसद में पारित राइट टू एजुकेशन एक्ट का हवाला देकर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में ऊंचाइयों तक ले जाने की बात हो रही है।
लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है स्कूलों में न तो नौनिहालों की पढ़ाई के लिए शिक्षक है और न ही गैर शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कोई अन्य इंतजाम। विभाग और सरकार के इन दावों की पोल खोल रहा है मिडल स्कूल न्यूली। शिक्षा खंड बंजार के राजकीय माध्यमिक स्कूल न्यूली में बच्चों की पढ़ाई राम भरोसे है।
एक ओर जहां पूरे देश में वर्ष 2009 से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत चौदह वर्ष तक के सभी बच्चों को शिक्षा अनिवार्य है वहीं देहुरिधार पंचायत के इस सरकारी स्कूल में छठी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं। स्कूल में अध्यापकों के न होने से जहां शिक्षा का अधिकार एक्ट-2009 का हनन हो रहा है, वहीं देश का भविष्य कहे जाने वाले इन बच्चों को रास्ता दिखाने के लिए अंग्रेज, विज्ञान, गणित व ड्राइंग विषयों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है। स्थानीय पंचायत के उपप्रधान भगत राम ने बताया कि स्कूल में पिछले कई वर्षो से टीजीटी आ‌र्ट्स, टीजीटी नॉन मेडिकल तथा कला अध्यापक के पद खाली पड़े हैं जिस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को दूसरे स्कूल में जाने के लिए तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी जिस बजह से छोटे बच्चे न तो किसी दूसरे स्कूल में दाखिला ले सकते हैं और न तो अपने स्कूल में पढ़ाई कर पा रहे हैं। बच्चों के अभिभावक ऊषा देवी, दीवान चंद, चंद्र प्रकाश ने कहा कि आधा शिक्षा सत्र बीत चुका। लेकिन अभी तक बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पूने राम ने कहा कि विभाग को अनेकों बार रिक्त पदों का ब्यौरा भेजा गया। लेकिन अभी तक किसी तरह की नियुक्ति नहीं हो पाई। समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि स्कूल में जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
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बंजार क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसके बारे में विभाग को पत्राचार के माध्यम से सूचित किया जाएगा।

-एमआर भारद्वाज, एसडीएम बंजार।

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