मंडी – प्रशिक्षित टीजीटी बेरोजगार संघ प्रदेशाध्यक्ष
कुलदीप मनकोटिया ने कहा कि देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक सैनिक
की भर्ती शारीरिक एवं लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाती है।
मगर देश के निर्माता शिक्षक की भर्ती बिना लिखित परीक्षा के पिछले तीस साल से निरंतर जारी है। यह प्रयास देश की आजादी के लिए खतरा बना हुआ है। प्रशिक्षित टीजीटी बेरोजगार संघ प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप मनकोटिया, विजय, मनीष, शीला, संजीव, सुरेश, सुरेंद्र इंद्र सिंह, हरिद्रपाल, अजय, लेखराज संजय ने संयुक्त बयान में कहा कि अपने निजी हित साधने के लिए सरकारें स्टॉप गैप अरेंजमेंट के नाम पर शिक्षकों की भर्तियां कर लेती हैं। सरकारें अपनी बनाई नीतियों के अनुसार, नियमित शिक्षकों का अरेंजमेंट समय पर नहीं करतीं। इसके विपरीत स्टॉप गैप अरेंजमेंट के तहत भर्ती किए गए शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाने का प्रयास करती हैं, जो संविधान की धारा 309 का सीधा उल्लंघन है। संविधान की धारा 309 यह कहती है कि नौकरी चाहे केंद्र सरकार की हो या राज्य सरकार की, सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिलने चाहिएं। यहां तक कि अस्थायी शिक्षकों की भर्तियों में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की पालन भी नहीं हो रही। उदाहरण के तौर पर इन 15000 अस्थायी शिक्षकों के स्थान पर पिछले 15 साल में एक भी शिक्षक वैचवाइज नहीं रखा गया। इससे 1999-2003 बैच के असंख्य उम्मीदवार बेरोजगार बना दिए गए हैं। इससे बड़ा बेरोजगारों के साथ और कौन सा अन्याय हो सकता है। इन भर्तियों में रोस्टर नहीं लगने के कारण सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर नहीं मिल सके, जिससे समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग और भी अधिक कमजोर हो गए हैं। आरटीई एक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों की नियुक्ति अस्थायी नहीं होनी चाहिए।
मगर देश के निर्माता शिक्षक की भर्ती बिना लिखित परीक्षा के पिछले तीस साल से निरंतर जारी है। यह प्रयास देश की आजादी के लिए खतरा बना हुआ है। प्रशिक्षित टीजीटी बेरोजगार संघ प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप मनकोटिया, विजय, मनीष, शीला, संजीव, सुरेश, सुरेंद्र इंद्र सिंह, हरिद्रपाल, अजय, लेखराज संजय ने संयुक्त बयान में कहा कि अपने निजी हित साधने के लिए सरकारें स्टॉप गैप अरेंजमेंट के नाम पर शिक्षकों की भर्तियां कर लेती हैं। सरकारें अपनी बनाई नीतियों के अनुसार, नियमित शिक्षकों का अरेंजमेंट समय पर नहीं करतीं। इसके विपरीत स्टॉप गैप अरेंजमेंट के तहत भर्ती किए गए शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाने का प्रयास करती हैं, जो संविधान की धारा 309 का सीधा उल्लंघन है। संविधान की धारा 309 यह कहती है कि नौकरी चाहे केंद्र सरकार की हो या राज्य सरकार की, सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिलने चाहिएं। यहां तक कि अस्थायी शिक्षकों की भर्तियों में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की पालन भी नहीं हो रही। उदाहरण के तौर पर इन 15000 अस्थायी शिक्षकों के स्थान पर पिछले 15 साल में एक भी शिक्षक वैचवाइज नहीं रखा गया। इससे 1999-2003 बैच के असंख्य उम्मीदवार बेरोजगार बना दिए गए हैं। इससे बड़ा बेरोजगारों के साथ और कौन सा अन्याय हो सकता है। इन भर्तियों में रोस्टर नहीं लगने के कारण सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर नहीं मिल सके, जिससे समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग और भी अधिक कमजोर हो गए हैं। आरटीई एक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों की नियुक्ति अस्थायी नहीं होनी चाहिए।