धर्मशाला। सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पीडब्ल्यूडी में अब
बेलदारों की भर्ती नहीं होगी। सड़कों की मरम्मत के लिए आया पैसा बेलदारों
की सैलरी में चला जाता है। अब नई तकनीक और मशीनें आ गई हैं जिनकी मदद से
सड़कों का रखरखाव करना बेहतर है और ठेकेदार से अच्छा है।
सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) ने ये बात विधानसभा के शीतकालीन (Himachal Vidhansabha Winter Session) सत्र के पांचवे दिन प्रश्नकाल के दौरान ज्वालामुखी से विधायक रमेश धवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही। रमेश धवाला ने पूछा था कि लोक निर्माण विभाग में बेलदारों (Beldar) के कितने पद स्वीकृत हैं और कितने रिक्त हैं। क्या सरकार बेलदारों के रिक्त पदों को केंद्र सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार सड़कों की लंबाई के अनुपात में भरने का विचार रखती है।
सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) में बेलदारों के 23,539 पद स्वीकृत हैं व 18,327 पद भरे हुए हैं तथा 5, 212 पद रिक्त हैं। बेलदारों के उपरोक्त रिक्त पदों को केन्द्र सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार भरना आवश्यक नहीं है क्योंकि वर्तमान में सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव, नए मानकों एवं अनुबंध प्रणाली जिसमें सड़कों का रखरखाव मुख्यतः अनुबंध में निहित शर्तों के अंतर्गत संबंधित ठेकेदारों द्वारा ही किया जाता है। इसके अतिरिक्त निर्माण एवं रख-रखाव में आधुनिक मशीनरी का अधिक उपयोग किया जाता है। अन्य पड़ोसी राज्यों में भी सड़कों का रख-रखाव नियमित बेलदार रखने की अपेक्षा मशीनरी एवं अनुबंध आधार पर ही करवाया जाता है।
सीएम जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) ने ये बात विधानसभा के शीतकालीन (Himachal Vidhansabha Winter Session) सत्र के पांचवे दिन प्रश्नकाल के दौरान ज्वालामुखी से विधायक रमेश धवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही। रमेश धवाला ने पूछा था कि लोक निर्माण विभाग में बेलदारों (Beldar) के कितने पद स्वीकृत हैं और कितने रिक्त हैं। क्या सरकार बेलदारों के रिक्त पदों को केंद्र सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार सड़कों की लंबाई के अनुपात में भरने का विचार रखती है।
सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) में बेलदारों के 23,539 पद स्वीकृत हैं व 18,327 पद भरे हुए हैं तथा 5, 212 पद रिक्त हैं। बेलदारों के उपरोक्त रिक्त पदों को केन्द्र सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार भरना आवश्यक नहीं है क्योंकि वर्तमान में सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव, नए मानकों एवं अनुबंध प्रणाली जिसमें सड़कों का रखरखाव मुख्यतः अनुबंध में निहित शर्तों के अंतर्गत संबंधित ठेकेदारों द्वारा ही किया जाता है। इसके अतिरिक्त निर्माण एवं रख-रखाव में आधुनिक मशीनरी का अधिक उपयोग किया जाता है। अन्य पड़ोसी राज्यों में भी सड़कों का रख-रखाव नियमित बेलदार रखने की अपेक्षा मशीनरी एवं अनुबंध आधार पर ही करवाया जाता है।